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बीबीएयू के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने ‘भारत बौद्धिक्स’ योजना के अंतर्गत कला विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान विषयों पर आधारित 21 पुस्तकों का किया विमोचन

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने दिनांक 19 दिसंबर को विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के अत्यंत महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के अंतर्गत शिक्षा की मुख्य धारणा में भारतीय ज्ञान परंपरा को एकीकृत करने के उद्देश्य से ‘भारत बौद्धिक्स’ योजना के अंतर्गत कला विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान विषयों पर आधारित 21 पुस्तकों का विमोचन किया।। कार्यक्रम के दौरान मुख्य तौर पर विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के क्षेत्र संयोजक प्रो. जय शंकर पांडेय, डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, आईक्यूएसी डॉयरेक्टर प्रो. शिल्पी वर्मा , डायरेक्टर रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. शिशिर कुमार एवं शिक्षा संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. राजशरण शाही उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन बीबीएयू के डॉ. सुभाष मिश्रा द्वारा किया गया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने विद्या भारती के इस प्रयास की सरहाना करते हुए विश्वविद्यालय के समस्त पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा के समुचित समावेशन की बात की। प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा व्यवस्था में सम्मिलित किया गया है तथा उसके समन्वय पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने बताया कि आज विश्व के समक्ष पर्यावरणीय संकट, नैतिक मूल्यों का ह्रास, आदर्शों की कमी, संस्कृति एवं परंपराओं से दूरी जैसी अनेक प्रकार की समस्याएँ दिखाई दे रही हैं, जिनका समाधान भारतीय ज्ञान परंपरा और दर्शन के माध्यम से संभव है। भारतीय ज्ञान की विशिष्टता और महत्त्व को विश्व सदियों से अनुभव करता आ रहा है और आज उसे और अधिक गहराई से समझ रहा है। यही कारण है कि भारतीय योग और दर्शन को आज भारत से भी अधिक विश्व के अनेक देशों में पढ़ा, अपनाया और व्यवहार में लाया जा रहा है।

चाहे भारतीय योग-दर्शन हो, वास्तुकला, मानसिक स्वास्थ्य, पंचकोश आधारित शिक्षा, स्थापत्य कला या आयुर्वेद इन सभी क्षेत्रों में भारतीय ज्ञान की समृद्ध परंपरा उपलब्ध है, जो समय की कसौटी पर परखी हुई है और जिनमें बिना अत्यधिक अनुसंधान के भी व्यावहारिक रूप से कार्य किया जा सकता है। प्रो. मित्तल ने बताया कि हम सभी का यह कर्तव्य है कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के मार्ग पर चलते हुए भारतीय ज्ञान और दर्शन का उपयोग विश्व की समकालीन समस्याओं के समाधान में किया जाए। इस दिशा में विद्या भारती एवं उच्च शिक्षण संस्थानों ने यह महत्त्वपूर्ण दायित्व अपने हाथ में लिया है कि भारतीय ज्ञान परंपरा और दर्शन की प्रामाणिकता को आधुनिक दृष्टिकोण एवं वैज्ञानिक दृष्टि के साथ जनमानस तक पहुँचाया जाए, ताकि समाज उसका सार्थक एवं व्यावहारिक उपयोग कर सके।

प्रो. जयशंकर पांडेय ने बताया कि विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान की ओर से उक्त विषय पर केंद्रित ‘भारत बौद्धिक्स’ परीक्षा का आयोजन उच्च शिक्षा स्नातक एवं परास्नातक विद्यार्थियों के लिए 31 जनवरी एवं 1 फरवरी को आयोजित किया जाएगा। यह परीक्षा ऑफलाइन मोड में होगी। यह परीक्षा हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में होगी। इसमें कुल 100 अंक का पेपर होगा। जिसमें 80 अंक बहुविकल्पीय प्रश्नों तथा 20 अंक वर्णनात्मक प्रश्नों के लिए निर्धारित है। उन्होंने बताया कि देशभर में इस परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रथम पुरस्कार ₹100000, द्वितीय पुरस्कार ₹50000 तृतीय पुरस्कार ₹25000 और चतुर्थ पुरस्कार ₹2500 व प्रमाण पत्र दिया जाएगा।

समस्त कार्यक्रम के दौरान प्रो. सुनीता मिश्रा, प्रो. हरिशंकर सिंह, विद्या भारती की ओर से डॉ. मंजुल त्रिवेदी, डॉ. सशक्त सिंह, डॉ. ऐश्वर्या सिंह, विभिन्न शिक्षक एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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