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यही मॉदिज्म है! भारतीय तिरंगा लगा कर “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज” के रास्ते सकुशल निकल आये भारतीय तेल व गैस के जहाज

मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। सोचो अगर कहीं वैश्विक समस्या के कारण पैट्रोल-डीजल, गैस की समस्या नहीं होती तो जॉर्ज सोरेस के नौकर देश में कितना गदर काट दिये होते? जिस समय वैश्विक परिपेक्ष्य में सभी को एकजुट होकर उसके दुष्प्रभाव से मिल-जुल कर निपटना चाहिये, उस समय भारत का विपक्ष अपने केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री के खिलाफ प्रदर्शन करवा रही है। इस कठिन समय में बहुत देश जहां इसका बहुत व्यापक असर हुआ है, जहां की सारी व्यवस्था चरमरा गयी है, क्या वहां का विपक्ष प्रदर्शन में जुटा है?या सरकार के साथ मिल कर इसका समाधान ढूढने पर मेहनत कर रहा है। जिन परिस्थितियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के ध्वज वाले तेल टैंकर “जग लाडली” जिसमें 80800 टन मुर्बन कच्चा तेल लेकर सुरक्षित भारत की ओर रवाना हुआ है। वह शीघ्र ही भारत पहुंचेगा। इस बीच खबर आयी है कि बांग्लादेश अप्रैल तक भारत से अतिरिक्त 45,000 टन डीजल आयात करेगा। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसी) के महाप्रबंधक (वाणिज्यिक एवं संचालन) मोहम्मद मुर्शीद हुसैन आजाद ने एएनआई को फोन पर बताया, “हाल ही में भारत से 5,000 टन डीजल बांग्लादेश पहुंचा है, और हमें 18 या 19 मार्च के आसपास भारत से 5,000 टन डीजल और प्राप्त होगा। हमें भारत से अतिरिक्त 40,000 टन डीजल आयात करने का प्रस्ताव मिला है। प्रक्रियात्मक कार्य पूरा होने के बाद – यानी एलसी खोलने और अन्य औपचारिकताओं के बाद – यह 40,000 टन डीजल भी अप्रैल तक बांग्लादेश पहुंच जाएगा।”

इसी को “मॉदिज्म” कहते हैं। दुनिया देखती रह गयी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल कूटनीति के परिणामस्वरूप संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा से भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर ‘जग लाडकी’ 80,800 टन मुर्बन कच्चा तेल लेकर सुरक्षित भारत के लिए रवाना हो गया। फुजैरा तेल टर्मिनल पर हमले के बावजूद जहाज और उसके सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। इससे पहले एलपीजी जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर चुके हैं। क्षेत्र में तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिस पर भारत सरकार लगातार नजर रखे हुए है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा से भारतीय ध्वज वाला एक कच्चे तेल का टैंकर सुरक्षित रूप से रवाना हो गया है। सरकार ने रविवार को बताया कि तेल टर्मिनल पर हमले के बावजूद जहाज ने सुरक्षित तरीके से तेल लोड किया और भारत के लिए रवाना हो गया।सरकार ने कहा कि वह पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और ईंधन आपूर्ति तथा समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार की ओर से दी गयी जानकारी के अनुसार ‘जग लाडकी’ नाम का जहाज करीब 80,800 टन मुर्बन कच्चा तेल लेकर फुजैरा से भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर रवाना हुआ। यह जहाज भारत की ओर आ रहा है और उसमें सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। यह युद्ध प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकलने वाला चौथा भारतीय ध्वज वाला जहाज है।जानकारी के अनुसार 14 मार्च 2026 को जब ‘जग लाडकी’ फुजैरा के सिंगल प्वाइंट मूरिंग पर कच्चा तेल लोड कर रहा था, उसी समय फुजैरा तेल टर्मिनल पर हमला हुआ था। इसके बावजूद जहाज सुरक्षित तरीके से वहां से रवाना हो गया और अब भारत की ओर बढ़ रहा है। इस जहाज का सुरक्षित निकलना भारतीय कूटनीति के लिए भी अहम माना जा रहा है। जहाज में लदा कच्चा तेल भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है। इससे पहले शनिवार को दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी वाहक जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ भी युद्ध प्रभावित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर चुके हैं। इन दोनों जहाजों में करीब 92,712 टन एलपीजी लदा हुआ है।

‘शिवालिक’ 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचेगा, जबकि ‘नंदा देवी’ 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंचेगा। ये दोनों जहाज उन 24 जहाजों में शामिल थे जो क्षेत्र में युद्ध शुरू होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए थे। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में 24 जहाज फंसे हुए थे, जबकि चार जहाज पूर्वी हिस्से में फंसे थे। पूर्वी हिस्से में फंसे जहाजों में भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर ‘जग प्रकाश’ भी शामिल था। ‘जग प्रकाश’ ने शुक्रवार को युद्ध प्रभावित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार किया। इस जहाज ने ओमान के सोहार बंदरगाह से पेट्रोल लोड किया था और अब यह तंजानिया के तांगा बंदरगाह की ओर जा रहा है। इसके 21 मार्च को तांगा पहुंचने की उम्मीद है। इस बीच भारत सरकार ने बताया है कि इस क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय जहाज और नाविक सुरक्षित हैं। समुद्री गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। फिलहाल फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं, जिनमें 611 भारतीय नाविक सवार हैं।

भारत अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों और उसके बाद तेहरान की जवाबी कार्रवाई से पहले भारत के कच्चे तेल का आधे से ज्यादा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता था। इसके अलावा गैस का लगभग 30 प्रतिशत और एलपीजी का 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा भी सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से आयात किया जाता था। इस संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकाबंदी जैसी स्थिति बन गई है, जो खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य मार्ग है।भारत ने कच्चे तेल की आपूर्ति में आई कुछ कमी को रूस जैसे देशों से तेल खरीदकर पूरा किया है। हालांकि गैस की आपूर्ति औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए कम कर दी गई है और होटल तथा रेस्टोरेंट जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मिलने वाली एलपीजी भी घटा दी गई है।

जहाजरानी महानिदेशालय ने जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के साथ समन्वय बनाकर स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। नियंत्रण कक्ष सक्रिय होने के बाद से अब तक नाविकों, उनके परिवारों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों के करीब 2,995 फोन कॉल और 5,357 से ज्यादा ईमेल का जवाब दिया जा चुका है। जहाजरानी महानिदेशालय ने अब तक खाड़ी क्षेत्र से 276 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाने में मदद की है। इनमें पिछले 24 घंटों में हवाई अड्डों और क्षेत्रीय स्थानों से वापस लाए गए 23 नाविक भी शामिल हैं।देश के सभी प्रमुख बंदरगाह भी जहाजों की आवाजाही और माल संचालन पर नजर रख रहे हैं। जहाजरानी मंत्रालय विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों, जहाज कंपनियों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े पक्षों के साथ मिलकर भारतीय नाविकों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार को जारी रखने के लिए समन्वय कर रहा है।

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