बुद्ध पूर्णिमा पर बीबीएयू में भव्य आयोजन, बुद्ध के विचारों पर हुआ गहन मंथन; शिक्षा, समरसता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर जोर

लखनऊ स्थित बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर एक भव्य और गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्थायी आयोजन समिति और इतिहास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बुद्ध के विचारों, दर्शन और उनकी प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

मुख्य अतिथि ने बुद्ध के विचारों की वैश्विक प्रासंगिकता बताई
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के पैथोलॉजी विभाग के डॉ. सुरेश बाबू उपस्थित रहे। उन्होंने बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं आज पूरे विश्व में मार्गदर्शक के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उन्होंने बताया कि बौद्ध दर्शन तार्किक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शोधपरक मानसिकता को बढ़ावा देता है, जो आधुनिक समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे मूल्यों को समाज की मजबूती का आधार बताते हुए सकारात्मक और तार्किक सोच विकसित करने पर जोर दिया।
विशिष्ट अतिथि ने आत्मनिर्भरता और आत्ममंथन पर दिया बल
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में लोकबंधु अस्पताल के पूर्व निदेशक डॉ. सुरेश कौशल ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं अपना दीपक बनकर ज्ञान और सकारात्मकता का प्रसार करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे आत्मनिर्भर बनें, अपनी क्षमताओं को पहचानें और आत्ममंथन के जरिए खुद को लगातार बेहतर बनाएं।

कार्यक्रम की शुरुआत बुद्ध वंदना से, ध्यान सत्र भी हुआ आयोजित
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों और शिक्षकों को खटक पहनाकर सम्मानित करने के साथ हुई, जिसके बाद बुद्ध वंदना का उच्चारण किया गया। इस दौरान ध्यान (मेडिटेशन) सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आयोजन के अंत में सभी को पायस वितरित किया गया।
शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षक, गैर-शिक्षण अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। इस आयोजन के माध्यम से बुद्ध के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने और समाज में शांति, समरसता तथा प्रगतिशील सोच को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।
