रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय में राधेश्याम कथावाचक शोधपीठ की बैठक सम्पन्न, राज्य स्तरीय कार्यक्रमों की रूपरेखा तय, कुलपति प्रो. के.पी. सिंह के मार्गदर्शन में शोधपीठ को मिलेगी नई दिशा

बरेली,06 मई।महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय (एमजेपीआरयू) के कुलपति प्रो. के.पी. सिंह के कुशल नेतृत्व एवं कुशल मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय में स्थापित पं० राधेश्याम कथावाचक शोधपीठ की गतिविधियों को लेकर आज एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कुलपति प्रो. सिंह के स्पष्ट निर्देशों एवं शोधपीठ के प्रति उनके सकारात्मक दृष्टिकोण के कारण ही शोधपीठ को नियमित गतिविधियों एवं भौतिक संसाधन उपलब्ध कराने में तेजी आई है।

बैठक में शोधपीठ की नवनियुक्त समन्वयक प्रो. अनीता त्यागी ने शोधपीठ के सभी सह-समन्वयकों के साथ अगले शैक्षणिक सत्र में शोधपीठ के द्वारा आयोजित किए जाने वाले विभिन्न शैक्षणिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की। कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने अपने संदेश में कहा कि शोधपीठ को केवल एक औपचारिक इकाई न रखते हुए इसे जन-जन तक पहुँचाने वाला एक सक्रिय मंच बनाया जाना चाहिए। उनके इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि शोधपीठ को अपनी गतिविधियों के संचालन हेतु प्रशिक्षण एवं नियोजन प्रकोष्ठ (Training and Placement Cell) भवन में औपचारिक स्थान आवंटित किया गया है।
बैठक में पं० राधेश्याम कथावाचक जी के साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं रंगमंचीय योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने हेतु नियमित अकादमिक गतिविधियाँ आयोजित करने पर बल दिया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा शोधपीठ के लिए आवंटित यह स्थान शोधपीठ की बैठकों, संगोष्ठियों, व्याख्यानों, शोधपरक चर्चाओं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का केंद्र होगा। साथ ही, इस केंद्र पर पं० राधेश्याम कथावाचक जी की पौत्री श्रीमती शारदा भार्गव द्वारा उपलब्ध कराया गया साहित्य एवं शोध सामग्री भी विद्यार्थियों और शोधार्थियों के अध्ययन एवं अनुसंधान हेतु उपलब्ध रहेगी।
प्रमुख निर्णय:- पुण्यतिथि (26 अगस्त 2026): पं० राधेश्याम कथावाचक जी की 62वीं पुण्यतिथि को राज्य स्तरीय कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं रंगकर्मियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही स्मृति व्याख्यान, साहित्यिक परिचर्चा एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन भी प्रस्तावित है।

जयंती (25 नवंबर 2026): पंडित जी की जयंती के अवसर पर विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। विशेष रूप से उनके द्वारा रचित नाटकों का मंचन एवं अभिनय प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे हिंदी रंगमंच की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा सके।
राष्ट्रीय संगोष्ठी (मध्य जुलाई 2026): शोधपीठ के तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर के विद्वान पं० राधेश्याम कथावाचक जी के साहित्य एवं रंगमंचीय योगदान पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
बैठक का समापन शोधपीठ की समन्वयक प्रो. अनीता त्यागी की अध्यक्षता में हुआ। इस अवसर पर कुलपति प्रो. के.पी. सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए शोधपीठ को एक सक्रिय एवं प्रभावी शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित करने हेतु नियमित कार्यक्रमों एवं शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की गई। बैठक में शोधपीठ के सह समन्वयक डॉ. अजीत सिंह, डॉ. आभा त्रिवेदी एवं विभाग के अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।
बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट
