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बहराइच में पत्रकारों पर दर्ज एफआईआर को लेकर विवाद गहराया, यूपीडब्ल्यूजेयू ने कार्रवाई वापस लेने की उठाई मांग

लखनऊ: बहराइच में भ्रष्टाचार से जुड़ी खबरों के प्रकाशन के बाद पत्रकारों पर दर्ज एफआईआर को लेकर विवाद तेज हो गया है। यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन (यूपीडब्ल्यूजेयू) ने इस मामले को पत्रकार उत्पीड़न बताते हुए जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

संगठन ने वरिष्ठ पत्रकारों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और कथित तौर पर उत्पीड़न में शामिल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई है।

भ्रष्टाचार की खबरों के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

यूपीडब्ल्यूजेयू के प्रदेश अध्यक्ष टीबी सिंह ने आरोप लगाया कि बहराइच नगरपालिका में भ्रष्टाचार, अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़ी खबरों के प्रकाशन से नाराज होकर अधिशासी अधिकारी प्रमिता सिंह ने वरिष्ठ पत्रकार रफीकुल्लाह और मसूद कादरी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया।

उन्होंने कहा कि दोनों पत्रकार लंबे समय से स्थानीय मुद्दों और नगर पालिका से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठा रहे थे।

फेसबुक से खबर हटवाने का भी आरोप

संगठन की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि भारत समाचार से जुड़े पत्रकार रेहान ने जब नगरपालिका में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित खबर प्रसारित की तो जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने अधिशासी अधिकारी की मौजूदगी में उनसे फेसबुक से खबर हटवाई।

यूपीडब्ल्यूजेयू का दावा है कि अब पत्रकार रेहान और उनके परिवार के खिलाफ भी झूठे मुकदमे दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।

पत्रकार संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी

यूपीडब्ल्यूजेयू के संगठन सचिव अजय त्रिवेदी ने कहा कि यदि पत्रकारों पर दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गई और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन का प्रतिनिधिमंडल अपर मुख्य सचिव गृह और सूचना विभाग से मुलाकात कर विरोध दर्ज कराएगा।

साथ ही नगर विकास विभाग को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी की जाएगी।

नगरपालिका में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

पत्रकारों का आरोप है कि बहराइच नगरपालिका में आउटसोर्स एजेंसी के जरिए 450 सफाईकर्मियों की भर्ती दिखाई गई है, जिनमें से 58 कर्मचारी केवल कागजों में मौजूद हैं और उनके नाम पर धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।

इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया कि शासनादेश के विपरीत लोक निर्माण विभाग और जिला पंचायत की सड़कों का निर्माण नगरपालिका बजट से कराया गया और भुगतान भी कर दिया गया।

पत्रकारों के मुताबिक कई स्थानों पर कुछ महीने पहले बनी इंटरलॉकिंग सड़कें धंस गईं, जिसके बाद दोबारा टेंडर कर निर्माण कराया जा रहा है। वहीं स्ट्रीट लाइट खरीद में भी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। दावा किया गया कि 1500 रुपये कीमत वाली स्ट्रीट लाइटें 18 हजार रुपये में खरीदी गईं, जिनमें से अधिकांश काम नहीं कर रहीं।

उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज

बहराइच के पत्रकारों और पत्रकार संगठनों ने योगी सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है तो इन आरोपों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।

 

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