रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के वाणिज्य एवं प्रबंध संकाय के शोधार्थी प्रवेंद्र दीक्षित का पीएच.डी. वाइवा वॉइस प्रस्तुतीकरण संपन्न

बरेली,19 मई।वाणिज्य एवं प्रबंध संकाय, विभाग, व्यवसाय प्रशासन, एम.जे.पी.रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली के शोधार्थी प्रवेंद्र दीक्षित का पीएच.डी. वाइवा वॉइस प्रस्तुतीकरण कल आयोजित किया गया। यह परीक्षा बाह्य परीक्षक प्रोफेसर बी.के. पुनिया (प्रोफेसर एवं पूर्व कुलपति, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक) की उपस्थिति में संपन्न हुई।

प्रस्तुतीकरण में शोध निर्देशक प्रोफेसर पी.बी. सिंह (माननीय कुलपति, एस.एस. विश्वविद्यालय, शाहजहाँपुर), प्रोफेसर तुलिका सक्सेना (विभागाध्यक्ष, व्यवसाय प्रशासन), विभाग के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
शोधार्थी ने अपने शोध का शीर्षक “ग्रीन मार्केटिंग और इसका उपभोक्ता की धारणा पर प्रभाव – रोहिलखंड क्षेत्र का एक अध्ययन” प्रस्तुत किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के रोहिलखंड क्षेत्र (बरेली, बदायूँ, शाहजहाँपुर और पीलीभीत) में पर्यावरण-अनुकूल एफएमसीजी उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं की प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया।
उपभोक्ताओं में हरित उत्पादों के प्रति जागरूकता तो पर्याप्त है, लेकिन यह जागरूकता हमेशा वास्तविक खरीद व्यवहार में परिवर्तित नहीं होती है। इसे ‘अभिवृत्ति-व्यवहार अंतराल’ (Attitude-Behaviour Gap) के रूप में पहचाना गया।
हरित विपणन के दावों पर विश्वास उपभोक्ता जागरूकता और धारणा को प्रभावित करने वाला सबसे शक्तिशाली कारक है।

शिक्षा और आय का स्तर उपभोक्ताओं के हरित मूल्यों और खरीद रुझान पर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है, जबकि आयु का कोई विशेष प्रभाव नहीं पाया गया।
मूल्य संवेदनशीलता और पर्यावरणीय चिंता भी प्रमुख कारकों के रूप में उभरे।
शोधार्थी ने पारदर्शी, विश्वसनीय और सूचनाप्रद हरित विपणन रणनीतियों पर बल दिया। उन्होंने क्षेत्र-विशिष्ट जागरूकता अभियान, सशक्त इको-लेबलिंग प्रथाओं, और एफएमसीजी कंपनियों द्वारा हरित उत्पादों की कीमत, पहुँच एवं संचार को प्रभावी बनाने की सिफारिश की, ताकि उपभोक्ताओं में संदेह कम हो सके और सतत खरीद व्यवहार को बढ़ावा मिल सके।
इस अवसर पर विभाग के शिक्षकगण एवं शोधार्थी – प्रोफेसर संजय मिश्रा, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. रोमिता खुराना, डॉ. सौरभ वर्मा, पुष्पेंद्र मौर्य, बाला प्रताप, आदित्य एवं मोहम्मद सोहैल सहित सभी उपस्थित थे।
बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट
