बीबीएयू में राजभाषा कार्यान्वयन समिति की त्रैमासिक बैठक, विश्वविद्यालय में हिन्दी को बढ़ावा देने पर जोर

लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में गुरुवार को हिन्दी प्रकोष्ठ की ओर से राजभाषा कार्यान्वयन समिति की त्रैमासिक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह और सहायक निदेशक राजभाषा डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव भी मंच पर उपस्थित रहे।

बैठक की शुरुआत में डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव ने उपस्थित सदस्यों को बैठक के उद्देश्य, कार्ययोजना और प्रस्तावित गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। इसके बाद कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने विश्वविद्यालय में हिन्दी के व्यापक उपयोग और उसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।
हिन्दी को व्यवहार और प्रशासन की भाषा बनाने पर जोर
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि हिन्दी को बढ़ावा देना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कार्यालयी कार्यों, नोटिंग, ड्राफ्टिंग और पत्राचार में हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि राजभाषा नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों, बैठकों और आयोजनों के ब्रोशर हिन्दी में भी उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रश्नपत्रों को द्विभाषीय स्वरूप में तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जाए।
हिन्दी ट्रांसलेशन और पब्लिकेशन सेल बनाने का प्रस्ताव
प्रो. मित्तल ने विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षकों और कर्मचारियों के आवासों तथा गेस्ट हाउस के नाम हिन्दी में रखने की बात कही। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को हिन्दी में हस्ताक्षर करने के लिए प्रेरित करने का भी सुझाव दिया।

कुलपति ने विश्वविद्यालय में ‘हिन्दी ट्रांसलेशन एंड इंटरप्रिटेशन सेल’ और ‘हिन्दी पब्लिकेशन सेल’ की स्थापना का प्रस्ताव भी रखा। उनका कहना था कि इससे हिन्दी में अनुवाद, प्रकाशन और अकादमिक सामग्री को बढ़ावा मिलेगा और विद्यार्थियों व शोधार्थियों को बेहतर संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
15 दिवसीय कार्यशालाएं और भाषा एम्बेसडर की पहल
बैठक में हिन्दी दक्षता को बढ़ाने के लिए समय-समय पर 15 दिवसीय कार्यशालाओं के आयोजन का सुझाव भी दिया गया। इसके अलावा प्रत्येक विभाग से ‘भाषा एम्बेसडर’ चुने जाने की बात कही गई, जो अपने-अपने विभागों में हिन्दी के प्रयोग को प्रोत्साहित करेंगे।
प्रो. मित्तल ने विभागों में हिन्दी वॉल बनाने का सुझाव देते हुए कहा कि वहां प्रतिदिन ‘वर्ड ऑफ द डे’ और हिन्दी से जुड़ी उपयोगी जानकारियां प्रदर्शित की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे छोटे लेकिन प्रभावी प्रयास हिन्दी को प्रशासन, शिक्षा और विश्वविद्यालय संस्कृति का मजबूत माध्यम बना सकते हैं।
बैठक के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष और शिक्षकगण उपस्थित रहे तथा हिन्दी के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपने विचार भी साझा किए।
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