रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रशासन विभाग में “इलेक्ट्रिक वाहनों की बाजार व्यवहार्यता” विषय पर शोध कार्य हेतु अजीत वर्मा को प्रदान की गई पी.एच.डी की उपाधि


बरेली, 04जून। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली द्वारा अजीत वर्मा को उनके शोध विषय “ An Empirical strategy Study on Market Feasibility of Electric Vehicles in India” पर किए गए शोध कार्य के लिए पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की गई है। यह शोध कार्य व्यवसाय प्रशासन विभाग के वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. संजय मिश्रा के निर्देशन में संपन्न हुआ।
अपने शोध में अजीत वर्मा ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की वर्तमान स्थिति, उपभोक्ताओं की स्वीकार्यता, चुनौतियों एवं संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन किया है। शोध के निष्कर्षों में यह पाया गया कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग अवसंरचना (Charging Infrastructure) का व्यापक विस्तार अत्यंत आवश्यक है।
शोध में सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों के क्रय एवं उपयोग को प्रोत्साहित करने हेतु अधिक सब्सिडी एवं प्रोत्साहन योजनाएं प्रदान करने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया गया है। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर बाजार को संगठित एवं सुव्यवस्थित करने तथा इस क्षेत्र के लिए प्रभावी नीतियां विकसित करने की अनुशंसा की गई है।

अध्ययन में सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से प्रत्येक राज्य में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। शोध के अनुसार, इससे प्रदूषण में कमी आएगी तथा टिकाऊ एवं हरित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
यह शोध भारत में इलेक्ट्रिक गतिशीलता (Electric Mobility) को बढ़ावा देने के लिए नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत तथा शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी सुझाव प्रदान करता है। अजीत वर्मा की यह उपलब्धि न केवल उनके अकादमिक समर्पण का प्रतीक है, बल्कि सतत विकास एवं हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान को भी दर्शाती है।
बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट
