मोदी सरकार में बड़ा बदलाव! केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ने तत्काल प्रभाव से किया मंजूर
नई दिल्ली: केंद्र सरकार में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। इस घटनाक्रम के बाद केंद्र सरकार में संभावित फेरबदल की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। वह अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद लिया फैसला
जानकारी के मुताबिक, जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो गया था। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने का निर्णय नहीं लिया, जिसके बाद उन्हें केंद्रीय मंत्री पद छोड़ना पड़ा। राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि इसी कारण उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया।
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में बने थे मंत्री
65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने 9 जून 2024 को मंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी और 11 जून 2024 से अपने मंत्रालयों का कार्यभार संभाला था।
चार दशक से अधिक समय से भाजपा से जुड़े
जॉर्ज कुरियन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वह वर्ष 1980 में पार्टी की स्थापना के समय से ही संगठन से जुड़े रहे हैं। लंबे राजनीतिक जीवन के दौरान उन्होंने पार्टी और विभिन्न सरकारी संस्थाओं में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में भी निभाई भूमिका
केंद्रीय मंत्री बनने से पहले जॉर्ज कुरियन राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा पूर्व रेल राज्य मंत्री ओ. राजगोपाल के विशेष कार्याधिकारी के रूप में भी उन्होंने काम किया था।

केरल की राजनीति से जुड़ा रहा नाम
जॉर्ज कुरियन का राजनीतिक आधार केरल रहा है। उनका जन्म 20 सितंबर 1960 को केरल के कोट्टायम जिले के एट्टुमानूर क्षेत्र में हुआ था। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और स्नातक व स्नातकोत्तर स्तर पर विधि शिक्षा प्राप्त की।
ईसाई समुदाय तक पहुंच बनाने की रणनीति का हिस्सा माने गए थे
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में जब उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था, तब इसे केरल में भाजपा की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा गया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि राज्य के ईसाई मतदाताओं तक पहुंच मजबूत करने के उद्देश्य से उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया था।
केरल में नई जिम्मेदारी मिलने की अटकलें
सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व भविष्य में जॉर्ज कुरियन को केरल की राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका दे सकता है। हाल ही में उन्होंने विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली थी। ऐसे में उनके इस्तीफे को संगठनात्मक और राजनीतिक पुनर्संरचना से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
फेरबदल की चर्चाएं हुईं तेज
जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद अब केंद्र सरकार में संभावित मंत्रिमंडलीय फेरबदल को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि सरकार या पार्टी की ओर से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
