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राम मंदिर दान विवाद में चंपत राय ने तोड़ी चुप्पी, राम भक्तों को लिखी चिट्ठी; बोले- सभी आरोपों का दूंगा क्रमवार जवाब

लखनऊ: राम मंदिर दानराशि से जुड़े कथित विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्रस्ट की बैठक में उनके और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार होने के बाद मामला शांत पड़ता दिख रहा था, लेकिन एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट सामने आने के अगले ही दिन चंपत राय ने सोशल मीडिया पर राम भक्तों के नाम एक खुला पत्र जारी कर नया राजनीतिक और सामाजिक विमर्श खड़ा कर दिया।

चंपत राय ने अपने पत्र में उन पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि अपने ऊपर लगाए गए प्रत्येक आरोप का वह क्रमवार और तथ्यों के आधार पर जवाब देंगे। पत्र में उन्होंने अपने 41 वर्षों के प्रचारक जीवन और वर्ष 1991 से राम मंदिर आंदोलन एवं अयोध्या से जुड़े अपने योगदान का भी उल्लेख किया।

एसआईटी को दिए बयान का हिस्सा आया सामने

सोशल मीडिया पोस्ट के कुछ समय बाद एसआईटी के समक्ष चंपत राय द्वारा दिए गए लिखित बयान का एक हिस्सा भी सामने आया। इसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि दानपात्रों में जमा धनराशि की गिनती और बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।

उन्होंने कहा कि बैंक के साथ हुए समझौता ज्ञापन पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। बैंक अधिकारियों के साथ नोटों की गिनती की प्रक्रिया में किए गए बदलाव, सुरक्षा व्यवस्था या उससे जुड़े निर्णयों की उन्हें जानकारी नहीं थी और न ही वह उस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा थे।

जिम्मेदारी को लेकर अनिल मिश्रा पर उठे सवाल

चंपत राय के बयान के बाद दानपात्र और बैंकिंग प्रक्रिया की जिम्मेदारी को लेकर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा पर सवाल और तेज हो गए हैं। बताया जा रहा है कि बैंक के साथ हुए समझौता ज्ञापन के हस्ताक्षरकर्ता अनिल मिश्रा थे। इसी कारण अब पूरे मामले में उनकी भूमिका को लेकर जांच एजेंसियां अधिक सक्रिय हो गई हैं। शुरुआती एसआईटी रिपोर्ट में भी उनके संबंध में गंभीर सवाल उठाए गए हैं और उन्हें नोटिस भेजकर पूछताछ की तैयारी की जा रही है।

गोविंददेव गिरी ने कहा- गलतियां हुई होंगी, लेकिन दोषी नहीं

उधर, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि चंपत राय निष्कलंक हैं, हालांकि उनके स्तर पर कार्यप्रणाली में कुछ लापरवाही जैसी गलतियां हुई हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इससे किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

ट्रस्ट की बैठक में भी राम मंदिर निर्माण और संगठन के लिए चंपत राय के योगदान की सराहना की गई। वहीं, एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट के बाद चंपत राय के सार्वजनिक रूप से सामने आने से इस पूरे प्रकरण में आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू हो गया है।

ट्रस्ट की बैठक से पहले चला हाईवोल्टेज घटनाक्रम

राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक से पहले अयोध्या में कई स्तर पर मंथन और बैठकों का दौर चला। ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की नाराजगी भी चर्चा का विषय रही। बताया गया कि वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उनसे मुलाकात कर बैठक में शामिल होने का आग्रह किया, जिसके बाद वह बैठक में पहुंचे।

बैठक से पहले जारी अपने संदेश में महंत नृत्य गोपाल दास ने दानराशि से जुड़े विवाद पर दुख जताते हुए कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है कि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होगी।

नए सीईओ की नियुक्ति की तैयारी तेज

ट्रस्ट की आगामी कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इसके लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। माना जा रहा है कि 22 जुलाई को प्रस्तावित अगली बैठक में ट्रस्ट के पुनर्गठन और नए सीईओ के नाम पर फैसला लिया जा सकता है।

इस बीच, दान में मिले आभूषणों और अन्य बहुमूल्य उपहारों का रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने के बाद उपहारों से जुड़ी चर्चाएं काफी हद तक शांत हो गई हैं। हालांकि दानराशि प्रकरण की जांच अभी जारी है। अनिल मिश्रा को नोटिस भेजा जा चुका है और एसआईटी जल्द उनसे पूछताछ करेगी। वहीं, अयोध्या पुलिस भी आरोपियों से पूछताछ कर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।

 

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