‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से घटेगा चुनावी खर्च, विकास को मिलेगी रफ्तार: केशव प्रसाद मौर्य

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि “एक राष्ट्र, एक चुनाव” देश की आवश्यकता है। इससे बार-बार होने वाले चुनावों पर होने वाला आर्थिक बोझ कम होगा, सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों का समर्थन करते हुए इसे राष्ट्रहित, जनहित और सुशासन की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया।

संविधान संशोधन विधेयकों पर संयुक्त संसदीय समिति के साथ हुई चर्चा
लखनऊ के गोमती नगर स्थित होटल ताज में संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 तथा संघ राज्य क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 के संबंध में गठित संयुक्त संसदीय समिति के अध्ययन दौरे के दौरान आयोजित विचार-विमर्श में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश राज्य “एक राष्ट्र, एक चुनाव” समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने की।
बार-बार चुनाव से बढ़ता है आर्थिक और प्रशासनिक बोझ
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में लगातार चुनाव होने के कारण केंद्र और राज्य सरकारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। चुनावी प्रक्रिया में प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र का बड़ा हिस्सा लंबे समय तक चुनावी ड्यूटी में लगा रहता है, जिससे विकास परियोजनाओं की गति प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि यदि लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएं तो संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग होगा और विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी।
संविधान संशोधन से तैयार होगा एक साथ चुनाव का आधार
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और संघ राज्य क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 “एक राष्ट्र, एक चुनाव” को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण संवैधानिक कदम हैं। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित अनुच्छेद 82ए के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने का संवैधानिक आधार तैयार किया गया है। इसके तहत राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित नियत तिथि से सदनों के कार्यकाल का समायोजन किया जाएगा तथा भारत निर्वाचन आयोग को एक साथ चुनाव कराने का अधिकार मिलेगा। आवश्यकता पड़ने पर किसी विशेष विधानसभा का चुनाव बाद में कराने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इसके अलावा अनुच्छेद 83 और 172 में भी संशोधन का प्रावधान किया गया है, ताकि समय से पहले सदन भंग होने की स्थिति में नवगठित सदन केवल शेष कार्यकाल तक ही कार्य करे और भविष्य में चुनावों का चक्र एक साथ बना रहे।
1951 से 1967 तक देश में लागू रही थी यह व्यवस्था
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1951 से 1967 तक देश में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ सफलतापूर्वक कराए जाते थे। उन्होंने कहा कि यह कोई नई व्यवस्था नहीं, बल्कि भारत की स्थापित लोकतांत्रिक परंपरा रही है, जो समय के साथ विभिन्न कारणों से बाधित हो गई। अब इसे दोबारा लागू करने का समय आ गया है।

चुनावी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की जरूरत
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में निर्वाचन आयोग ने विभिन्न राज्यों में कम समय में सफलतापूर्वक चुनाव कराए हैं। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव संपन्न कराने के साथ ही अन्य राज्यों में भी बेहतर मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण वाले राज्यों में भी मतदाता सहभागिता बढ़ी है। इससे स्पष्ट होता है कि चुनावी व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना
केशव प्रसाद मौर्य ने “वन नेशन, वन इलेक्शन” की परिकल्पना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक दूरदर्शी सुधार है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था लोकतांत्रिक प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितकारी बनाएगी तथा देश में सुशासन और विकास को नई मजबूती प्रदान करेगी।
बार-बार चुनाव से शिक्षा और विकास भी होते हैं प्रभावित
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी चुनावी कार्यों में लगाई जाती है, जिससे विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है। इसके अलावा पुलिस, सुरक्षा बलों तथा अन्य सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की चुनावी तैनाती से कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों पर भी असर पड़ता है। लगातार चुनाव राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ाते हैं।
विकसित भारत की दिशा में बताया महत्वपूर्ण कदम
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि “एक राष्ट्र, एक चुनाव” विकसित भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मजबूत होगी, शासन में स्थिरता आएगी, सार्वजनिक संसाधनों की बचत होगी, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी तथा नागरिकों पर पड़ने वाला आर्थिक और प्रशासनिक बोझ कम होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल भारत को अधिक सक्षम, समृद्ध और सुशासित राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
