ज्ञानवापी विवाद में सुलह की नई पहल, मुस्लिम पक्ष मीडिएशन में होगा शामिल; कानूनी दावे पर रहेगा कायम
वाराणसी: ज्ञानवापी विवाद से जुड़े मामलों में सुलह की दिशा में नई पहल देखने को मिली है। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने मध्यस्थता (मीडिएशन) की प्रक्रिया में शामिल होने पर सहमति जताई है। हालांकि, कमेटी ने स्पष्ट किया है कि मीडिएशन में भाग लेने का मतलब मस्जिद पर अपने कानूनी दावे से पीछे हटना नहीं है। कमेटी का कहना है कि वह अपने अधिकारों और पक्ष पर पहले की तरह कायम रहेगी।
कमेटी के अधिवक्ता मोहम्मद रईस अहमद ने बताया कि अंजुमन इंतजामिया मसाजिद मीडिएशन की बैठक में हिस्सा लेगी और प्रक्रिया के दौरान अपना पक्ष मजबूती से रखेगी। इस फैसले को लंबे समय से चल रहे ज्ञानवापी विवाद में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

चार मामलों पर होगी मध्यस्थता
जानकारी के अनुसार, ज्ञानवापी विवाद से जुड़े चार मामलों को मध्यस्थता के लिए भेजा गया है। मीडिएशन का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का प्रयास करना है। अब इस बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं कि क्या बातचीत से कोई सहमति बन पाती है या मामला आगे भी न्यायालय में ही चलता रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जिला न्यायाधीश ने ज्ञानवापी से जुड़े मामलों को मध्यस्थता केंद्र भेजा था। इसके बाद मध्यस्थता केंद्र ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर 14 जुलाई को वार्ता में शामिल होने के लिए बुलाया।
पहले किया था मना, अब बदला रुख

इससे पहले अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार कर दिया था। कमेटी के संयुक्त सचिव एस.एम. यासीन ने पत्र जारी कर कहा था कि गहन विचार-विमर्श के बाद संगठन ने मीडिएशन से अलग रहने का निर्णय लिया है। उनका कहना था कि इतने संवेदनशील मामले का समाधान न्यायालय के माध्यम से ही होना चाहिए।
हालांकि, बाद में कमेटी की ओर से रुख में बदलाव किया गया और उसके अधिवक्ताओं ने पुष्टि की कि वे मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होकर संगठन का पक्ष रखेंगे।
मामले पर बनी रहेगी सभी की नजर
ज्ञानवापी विवाद देश के सबसे चर्चित धार्मिक और कानूनी मामलों में शामिल है। ऐसे में मीडिएशन प्रक्रिया को लेकर दोनों पक्षों के रुख में आए इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि बातचीत के जरिए कोई समाधान निकलता है या फिर विवाद का अंतिम फैसला अदालत के जरिए ही होगा।
