गोण्डा बार एसोसिएशन में छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों का सम्मान, साहित्य को बताया समाज निर्माण का सशक्त माध्यम

गोण्डा: बार एसोसिएशन के अधिवक्ता साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कक्ष में रायपुर (छत्तीसगढ़) से आए प्रतिष्ठित साहित्यकारों के सम्मान में स्वागत समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और सामाजिक समरसता पर विचार साझा किए गए तथा अतिथियों का प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मान किया गया।

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि साहित्य जगत मेल-जोल और सामाजिक सौहार्द की संस्कृति को मजबूत बनाते हुए एक सुंदर एवं सभ्य समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि साहित्यिक परिवार की कोई सीमा नहीं होती, बल्कि उसका दायरा असीमित होता है।
साहित्य की कोई अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं
कार्यक्रम के आयोजक वरिष्ठ अधिवक्ता एवं साहित्यकार राजेश ओझा ने रायपुर से आए साहित्यकार करुणा शंकर पंडा, आर्थो सर्जन डॉ. सुनील देवांगन और डॉ. लक्ष्मी लाल साहूकार का स्वागत करते हुए कहा कि साहित्यिक परिवार किसी राज्य या देश की सीमाओं में बंधा नहीं होता। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और देशों के लोगों की अभिव्यक्ति भी साहित्य के माध्यम से अपनी प्रतीत होती है और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।

अतिथियों का किया गया सम्मान
समारोह के दौरान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि चंद्र त्रिपाठी ने करुणा शंकर पंडा, डॉ. सुनील देवांगन और डॉ. लक्ष्मी लाल साहूकार को प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर बार एसोसिएशन के महामंत्री सुनील कुमार पाण्डेय, अधिवक्ता एवं साहित्यकार शिवम त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता राम फेर प्रजापति तथा प्रमोद नंदन श्रीवास्तव सहित अन्य अधिवक्ताओं ने भी छत्तीसगढ़ से आए अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
