राम मंदिर ट्रस्ट की आज अहम बैठक, नए ट्रस्टियों पर लगेगी मुहर! चंपत राय के उत्तराधिकारी को लेकर भी बड़ा फैसला संभव
अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को होने वाली अहम बैठक में ट्रस्टियों के तीन रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। संगठन और संघ नेतृत्व के स्तर पर लंबे मंथन के बाद कई संतों के नामों पर विचार किया गया है। बताया जा रहा है कि करीब आधा दर्जन नामों में से अंतिम चयन किया जाना है, जिनमें अयोध्या से जुड़े दो संत सबसे आगे बताए जा रहे हैं। वहीं पूर्व महासचिव चंपत राय के उत्तराधिकारी के चयन को लेकर भी सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा अयोध्या नरेश के निधन के बाद एक पद पहले से रिक्त है। पिछली बैठक में कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया था, लेकिन ट्रस्टियों के चयन का फैसला टाल दिया गया था।

इन संतों के नाम सबसे आगे
सूत्रों के मुताबिक नियमित ट्रस्टी के लिए अयोध्या के संतों को प्राथमिकता दी जा रही है। संघ की ओर से जिन नामों पर अंतिम स्तर पर विचार किया गया है, उनमें आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण और स्वामी राजकुमार दास के नाम प्रमुख बताए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि स्वामी राजकुमार दास भारतीय शिक्षण मंडल के माध्यम से गुरुकुल स्थापना से जुड़े रहे हैं और संत समाज में उनकी विशेष पहचान है। वहीं आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण संघ के वैचारिक अधिष्ठान से जुड़े माने जाते हैं और विभिन्न विषयों पर अपने व्याख्यानों के लिए जाने जाते हैं। हिंदी, उर्दू, संस्कृत और अंग्रेजी भाषा पर उनकी अच्छी पकड़ बताई जाती है।
आमंत्रित सदस्यों में भी हो सकता है विस्तार
मणिराम छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास पहले से ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य हैं। उनके गुरु महंत नृत्यगोपाल दास ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। इसके अलावा रंगमहल के महंत रामशरण दास, रामकथा कुंज के महंत डॉ. रामानंद दास और कोशलेश सदन पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर के नाम भी चर्चा में हैं। यदि इन्हें नियमित ट्रस्टी नहीं बनाया जाता है तो आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
विहिप की ओर से भी भेजे गए नाम
सूत्रों के अनुसार दिल्ली में हुई विहिप के प्रन्यासी मंडल की बैठक में ट्रस्टियों के रिक्त पदों के लिए दो नाम प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें विहिप के राष्ट्रीय महामंत्री बीएल बांगड़ा का नाम प्रमुख बताया जा रहा है। चर्चा यह भी है कि वह ट्रस्टी के साथ महासचिव पद के भी दावेदार माने जा रहे हैं।
इसके अलावा बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक नीरज दानोदिया का नाम भी पहले चर्चा में रहा था। वहीं विहिप की ओर से अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुकुम चंद्र सांवला का नाम भी प्रस्तावित किए जाने की चर्चा है, हालांकि सूत्रों के मुताबिक उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से ट्रस्टी बनने में रुचि नहीं दिखाई है।
उधर, निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेन्द्र दास की ओर से अयोध्या राज परिवार के सदस्य, युवा साहित्यकार और अध्येता यतीन्द्र मिश्र का नाम भी ट्रस्टी पद के लिए प्रस्तावित किया गया था।

कृष्ण मोहन के पूर्णकालिक महासचिव बनने पर बना संशय
कार्यवाहक महासचिव के रूप में कृष्ण मोहन की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। पिछले 15 दिनों के दौरान उन्होंने मुख्य रूप से वित्तीय प्रबंधन और लेखा संबंधी कार्यों पर ध्यान दिया, जबकि मंदिर के दैनिक संचालन और प्रशासनिक व्यवस्थाएं अन्य पदाधिकारियों के माध्यम से संचालित होती रहीं।
जानकारी के अनुसार 15 जुलाई तक विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव मंदिर के प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करते रहे, जबकि ट्रस्ट सदस्य जिनेंद्र दास धार्मिक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालते रहे। सूत्रों का दावा है कि इस दौरान कृष्ण मोहन समय-समय पर पूर्व महासचिव चंपत राय से भी विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन लेते रहे।
महासचिव के हस्ताक्षर वाले कई काम रहे लंबित
सूत्रों के मुताबिक बीते 15 दिनों में ऐसे कई प्रशासनिक कार्य लंबित रहे, जिनमें महासचिव के हस्ताक्षर आवश्यक थे। बताया जा रहा है कि इसी कारण कुछ कर्मचारियों का जून माह का वेतन भी समय पर जारी नहीं हो सका। चर्चा है कि कई मामलों में यह कहा गया कि अंतिम निर्णय पूर्णकालिक महासचिव की नियुक्ति के बाद ही लिया जाएगा। ऐसे में बुधवार की बैठक में स्थायी महासचिव को लेकर महत्वपूर्ण फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।
सीईओ चयन पर फैसला टल सकता है
ट्रस्ट की बैठक में मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के चयन पर चर्चा होने की संभावना फिलहाल कम बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार इस पद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन मिलने के कारण चयन समिति अभी स्क्रीनिंग पूरी नहीं कर सकी है। ऐसे में बुधवार तक अंतिम तीन नाम तय होना मुश्किल माना जा रहा है।
गौरतलब है कि 6 जुलाई को चढ़ावा चोरी की घटना के बाद हुई बैठक में मंदिर प्रबंधन को अधिक पेशेवर बनाने और व्यवस्थाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से पहली बार मुख्य कार्यपालक अधिकारी नियुक्त करने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन भी किया गया था।
