पश्चिम एशिया में 163 दिन से जारी जंग, गाजा पर ट्रंप का प्लान खारिज; होर्मुज खोलने को ईरान ने रखीं नई शर्तें
तेहरान/वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच जारी संघर्ष 163वें दिन में पहुंच गया है। हालात सामान्य होने के बजाय लगातार जटिल होते जा रहे हैं। दूसरी ओर, गाजा में हमास और इस्राइल के बीच अक्तूबर 2023 से जारी युद्ध का भी स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। इसी बीच इस्राइल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा योजना को खारिज कर दिया है। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के मुद्दे पर ईरान और ओमान के बीच बातचीत अंतिम दौर में पहुंचने का दावा किया जा रहा है। यमन में हूती हमलों और ईरान की ओर से अमेरिकी सैनिकों को जमीन पर उतरने के खिलाफ चेतावनी ने तनाव और बढ़ा दिया है।
ट्रंप की गाजा योजना को इस्राइल ने क्यों ठुकराया?

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप की ओर से घोषित गाजा की 15 सूत्री योजना को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। कैबिनेट बैठक में नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइली सेना तब तक गाजा से पीछे नहीं हटेगी, जब तक हमास को वास्तव में पूरी तरह निरस्त्र नहीं किया जाता।
ट्रंप की योजना में हमास के निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस्राइली सेना की वापसी का प्रावधान बताया गया था। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इस्राइल दस्तावेज को स्वीकार नहीं करता, हालांकि गाजा के मुद्दे पर अमेरिका के साथ बातचीत जारी रहेगी।
दूसरी तरफ हमास के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य बासेम नईम ने कहा कि संगठन मध्यस्थों और अमेरिका से नेतन्याहू पर दबाव बनाने की उम्मीद कर रहा है। गाजा में करीब 20 लाख फलस्तीनी रहते हैं और इस्राइली सेना इस क्षेत्र के आधे से अधिक हिस्से पर नियंत्रण रखती है।
गाजा में युद्ध खत्म होने की राह क्यों अटकी?
गाजा में मौजूदा संकट की शुरुआत 7 अक्तूबर 2023 को हमास के इस्राइल पर हमले के बाद हुई। इसके बाद इस्राइल ने गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया। युद्ध के दौरान संघर्षविराम की स्थिति बनी, लेकिन स्थायी शांति की राह अब भी स्पष्ट नहीं है।
इस्राइल की प्रमुख शर्त हमास का निरस्त्रीकरण है, जबकि हमास अमेरिका और मध्यस्थ देशों से इस्राइल पर दबाव बनाने की उम्मीद कर रहा है। ट्रंप की योजना के बावजूद दोनों पक्षों की प्रमुख शर्तों में अंतर बना हुआ है। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती ऐसा समझौता तैयार करना है, जिसे इस्राइल और हमास दोनों स्वीकार कर सकें।
होर्मुज को लेकर ईरान और ओमान में क्या बातचीत हो रही?
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच अस्थायी समझौते पर बातचीत चल रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जहाज ईरान की तरफ से होर्मुज में प्रवेश कर ओमान की तरफ से बाहर निकल सकते हैं। अंतरिम व्यवस्था में जहाजों से शुल्क या टोल नहीं लेने की बात सामने आई है।
हालांकि, ईरान ने स्पष्ट किया है कि बातचीत आगे बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि होर्मुज तुरंत पूरी तरह खोल दिया जाएगा। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, समुद्री रास्ते और कानूनी व्यवस्था को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है, लेकिन जलडमरूमध्य खोलने से पहले कुछ अन्य शर्तें भी पूरी करनी होंगी। ईरान का कहना है कि अमेरिका को युद्ध से हुए नुकसान और समझौते से जुड़े विवादों पर कार्रवाई करनी होगी।
अमेरिका और इस्राइल के जहाजों पर रोक का प्रस्ताव
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने होर्मुज के प्रबंधन से जुड़ी योजना के सामान्य खाके को मंजूरी दी है। प्रस्ताव में कथित तौर पर ईरान को नुकसान पहुंचाने वाले देशों के जहाजों को तब तक रास्ता नहीं देने की बात कही गई है, जब तक नुकसान की भरपाई नहीं होती।
ईरानी अर्ध-सरकारी माध्यमों के हवाले से अमेरिका और इस्राइल को ऐसे शत्रु देशों में शामिल बताया गया है। हालांकि, योजना अभी विशेषज्ञों की समीक्षा के दौर में है और इसकी अंतिम शर्तों में बदलाव हो सकता है।
ईरान का कहना है कि पहले इस्तेमाल किया जाने वाला समुद्री यातायात मार्ग अब उसे मंजूर नहीं है। नया रास्ता तय करने के लिए तकनीकी और कानूनी स्तर पर अभी काफी काम किया जाना बाकी है।
ईरान ने अमेरिकी सैनिकों को दी सीधी चेतावनी
ईरानी सेना की जमीनी इकाई के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अली जहांशाही ने अमेरिका को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई अमेरिकी सैन्यकर्मी ईरान की जमीन पर कदम रखता है तो ईरान उसका मुकाबला करेगा।
उन्होंने कहा कि ईरानी सेना की जमीनी इकाइयां पूरी युद्ध तैयारी में हैं और देश की सीमाओं पर लगातार गतिविधियों तथा संभावित खतरों पर नजर रखी जा रही है।

ईरान का कहना है कि अमेरिका के साथ सीधी बातचीत तभी शुरू होगी, जब वह पिछले समझौते के उल्लंघन से जुड़े मुद्दों को दूर करेगा और हुए नुकसान की भरपाई करेगा।
यमन और सऊदी अरब में हूती हमलों से बढ़ा खतरा
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने यमन के लाल सागर तट पर सरकार के नियंत्रण वाले मोखा बंदरगाह को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया। यमन सरकार से जुड़े बलों के अनुसार, हमले में चार सैनिकों और तीन नागरिकों समेत कम से कम सात लोगों की मौत हुई, जबकि 15 नागरिक घायल हुए।
हमले में बंदरगाह की इमारतों, पियर, व्यावसायिक सामान और खाद्य सामग्री को नुकसान पहुंचा। हूतियों ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उनका निशाना सैन्य बल और गोदाम थे।
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने सऊदी अरब के जिजान में अरामको रिफाइनरी को भी ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने रिफाइनरी से जुड़ी एक सुविधा में आग लगने की पुष्टि की, लेकिन किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं दी। इन घटनाओं के बाद यमन में 2022 के संघर्षविराम के बाद फिर गृहयुद्ध भड़कने की आशंका बढ़ गई है।
अमेरिकी हथियार भंडार पर भी पड़ रहा युद्ध का असर
ईरान के साथ लंबे संघर्ष का असर अमेरिकी सैन्य हथियार भंडार पर भी पड़ रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने हथियारों और गोला-बारूद की खरीद तथा उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इसका उद्देश्य युद्ध में तैनात सैनिकों को जरूरत के मुताबिक हथियार उपलब्ध कराना है।
ईरान के साथ संघर्ष के दौरान उन्नत मिसाइल रोधी हथियारों के अमेरिकी भंडार पर दबाव बढ़ने की बात सामने आई है। इसका असर यूक्रेन और ताइवान जैसे अमेरिकी सहयोगियों पर भी पड़ सकता है, जो अमेरिका से सैन्य सहायता की उम्मीद रखते हैं।
अमेरिकी रक्षा विभाग ने हथियारों का उत्पादन बढ़ाने की प्रक्रिया को व्यापक सैन्य आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा बताया है, लेकिन मौजूदा संघर्ष ने इसकी जरूरत को और अहम बना दिया है।
क्या जल्द खुलेगा होर्मुज, कब सामान्य होगी तेल आपूर्ति?
होर्मुज को लेकर ईरान और ओमान के बीच चल रही बातचीत से समुद्री यातायात बहाल होने की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन अभी इसे अंतिम समझौता नहीं माना जा सकता। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा है कि नए समुद्री रास्ते और कानूनी व्यवस्था पर सहमति के करीब पहुंचा गया है। अमेरिका की ओर से भी ईरान और ओमान के बीच बातचीत में प्रगति होने की बात कही गई है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही बहाल होने पर ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी हटाने की संभावना बताई गई है। लेकिन ईरान ने होर्मुज खोलने के लिए अमेरिका से मुआवजे समेत कई शर्तें रखी हैं। इसलिए बातचीत में प्रगति के बावजूद सामान्य समुद्री आवाजाही कब पूरी तरह शुरू होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है।
163 दिन बाद भी शांति की राह साफ नहीं
पश्चिम एशिया में इस समय कई मोर्चे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। गाजा में इस्राइल और हमास के बीच स्थायी शांति का रास्ता नहीं निकला है। इस्राइल ने ट्रंप की 15 सूत्री योजना को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि हमास को पहले पूरी तरह निरस्त्र करना होगा।
दूसरी ओर, ईरान और अमेरिका के बीच सीधी बातचीत बंद है और तेहरान होर्मुज खोलने से पहले अमेरिकी कदमों तथा नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा है। यमन में हूती हमलों ने लाल सागर और सऊदी अरब को भी संकट के दायरे में ला दिया है। वहीं अमेरिका हथियारों का उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
यानी 163 दिन गुजरने के बाद भी संघर्ष के खत्म होने का स्पष्ट रास्ता सामने नहीं आया है। हजारों मौतों और भारी तबाही के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कूटनीति इन सभी मोर्चों पर तनाव कम कर पाएगी या पश्चिम एशिया एक और लंबे और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।
