Friday, September 4, 2026
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मच्छर किसे काटेगा, कैसे करता है फैसला? IIT कानपुर की रिसर्च खोलेगी शरीर की गंध और मच्छर के दिमाग का बड़ा राज

नई दिल्ली: बारिश और उमस के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। अक्सर एक ही कमरे में कई लोग मौजूद हों, तो मच्छर किसी एक व्यक्ति के आसपास ज्यादा मंडराते हैं, जबकि दूसरे लोगों की ओर उनका ध्यान कम रहता है। आखिर मच्छर इंसानों में ऐसा अंतर कैसे पहचानता है और किस व्यक्ति को अपना निशाना बनाने का फैसला किस आधार पर करता है? इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने के लिए IIT कानपुर के वैज्ञानिक मच्छर के दिमाग और उसकी गंध पहचानने की क्षमता का अध्ययन कर रहे हैं।

मच्छर इंसान की गंध को कैसे पहचानता है?

यह शोध IIT कानपुर के मेहता फैमिली सेंटर फॉर इंजीनियरिंग इन मेडिसिन में प्रोफेसर नितिन गुप्ता की प्रयोगशाला में किया जा रहा है। वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि मच्छर इंसान के शरीर से निकलने वाली गंध को किस तरह पहचानता है, यह जानकारी उसके दिमाग तक कैसे पहुंचती है और इसके आधार पर वह किसी खास व्यक्ति की ओर जाने का फैसला कैसे करता है। अध्ययन का मकसद मच्छर के व्यवहार के पीछे काम करने वाली पूरी जैविक प्रक्रिया को समझना है।

डेंगू-चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छर पर खास नजर

इस शोध में खास तौर पर Aedes aegypti मच्छर का अध्ययन किया जा रहा है। यह मच्छर डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वैज्ञानिक यह पता लगाने में जुटे हैं कि आखिर कुछ लोग मच्छरों को ज्यादा आकर्षित क्यों करते हैं, जबकि कुछ लोगों की ओर उनका आकर्षण कम होता है। इसके पीछे इंसान के शरीर से निकलने वाले अलग-अलग रासायनिक संकेतों की भूमिका हो सकती है।

हर इंसान के शरीर की गंध क्यों होती है अलग?

वैज्ञानिकों के मुताबिक इंसान के शरीर की गंध केवल पसीने से नहीं बनती। त्वचा पर मौजूद सूक्ष्म जीव भी अलग-अलग रसायन पैदा करते हैं, जो शरीर की कुल गंध को प्रभावित करते हैं। चूंकि हर व्यक्ति के शरीर की गंध एक जैसी नहीं होती, इसलिए यही अंतर मच्छरों के व्यवहार पर भी असर डाल सकता है। शोधकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि कौन सी गंध मच्छर को इंसान की ओर खींचती है और कौन से संकेत उसे किसी व्यक्ति से दूर कर सकते हैं।

मच्छर का दिमाग गंध को कैसे समझता है?

मच्छर के शरीर पर मौजूद विशेष सेंसर आसपास के रासायनिक संकेतों को पहचानते हैं। इसके बाद इन संकेतों से जुड़ी जानकारी उसके दिमाग तक पहुंचती है, जहां गंध से संबंधित सूचनाओं को समझा जाता है। वैज्ञानिक इसी प्रक्रिया का अध्ययन कर रहे हैं। आसान भाषा में कहें तो शोधकर्ताओं का सवाल है कि मच्छर क्या सूंघता है, उसका दिमाग उस गंध को कैसे समझता है और फिर वह किस दिशा में उड़कर इंसान तक पहुंचने का फैसला करता है।

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जीन में बदलाव करके भी समझी जा रही मच्छर की क्षमता

इस शोध में CRISPR Cas9 जैसी जेनेटिक तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। इसके जरिए मच्छर के कुछ खास जीन में बदलाव करके वैज्ञानिक यह देख सकते हैं कि इन बदलावों का उसकी गंध पहचानने की क्षमता और व्यवहार पर क्या असर पड़ता है। इससे उस जैविक व्यवस्था को समझने में मदद मिल सकती है, जिसके जरिए मच्छर इंसान को खोजता है।

खून पीने के बाद क्यों बदल जाता है मादा मच्छर का व्यवहार?

अध्ययन का एक अहम हिस्सा मादा मच्छर के खून पीने के बाद उसके व्यवहार में आने वाले बदलावों को समझना भी है। मादा मच्छर को अंडों के विकास के लिए खून की जरूरत होती है। खून पीने के बाद उसकी प्राथमिकता बदल जाती है। इसके बाद वह इंसान की तलाश करने के बजाय अंडे देने के लिए उपयुक्त जगह खोजने पर ज्यादा ध्यान देती है। वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि इस दौरान मच्छर के दिमाग में किस तरह के बदलाव होते हैं।

रिसर्च से भविष्य में मच्छरों से बचाव का नया तरीका मिल सकता है

इस शोध का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां बड़ी स्वास्थ्य चुनौती हैं। यदि वैज्ञानिक यह समझने में सफल होते हैं कि मच्छर इंसान तक पहुंचने के लिए किन गंधों और रासायनिक संकेतों का इस्तेमाल करता है, तो भविष्य में ऐसे तरीके विकसित किए जा सकते हैं जो इन संकेतों को बदल दें या मच्छर की पहचान प्रक्रिया को बाधित कर दें। यानी मच्छर को केवल मारने या भगाने के बजाय उसकी इंसान तक पहुंचने की प्रक्रिया को ही निशाना बनाया जा सकेगा।

IIT कानपुर का यह अध्ययन फिलहाल मच्छर की गंध पहचानने की क्षमता और उसके दिमाग में होने वाली गतिविधियों को समझने पर केंद्रित है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे मच्छर के व्यवहार को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी और भविष्य में डेंगू तथा चिकनगुनिया जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए नए वैज्ञानिक उपाय खोजे जा सकेंगे।

 

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