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त्योहारों से पहले यूपी की ग्रामीण सड़कों को मिलेगी नई रफ्तार, CM योगी का निर्देश- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के सभी मार्ग हों गड्ढामुक्त

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगामी त्योहारों को देखते हुए उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बने सभी मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर गड्ढामुक्त करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री आवास पर हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने अधिकारियों से सड़कों की मरम्मत, नवीनीकरण और अनुरक्षण कार्यों में तेजी लाने को कहा, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बेहतर और सुगम आवागमन सुविधा मिल सके।

बैठक में उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी शिव सहाय अवस्थी, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास सौरभ बाबू समेत अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

ग्रामीण सड़कों की मरम्मत और अनुरक्षण पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत निर्मित सभी मार्गों की स्थिति की लगातार निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान बढ़ने वाले आवागमन को देखते हुए जरूरी मरम्मत, नवीनीकरण और अनुरक्षण कार्य समय पर पूरे किए जाएं।

मुख्य कार्यपालक अधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बने मार्गों के अनुरक्षण कार्यों की लगातार समीक्षा की जा रही है। विभाग की ओर से सड़कों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू की गई है।

ई-मार्ग पोर्टल से हो रही सड़कों की निगरानी

वर्तमान में पांच वर्षीय अनुरक्षण अवधि के तहत 2,405 मार्गों की निगरानी की जा रही है, जिनकी कुल लंबाई 17,726.544 किलोमीटर है। वहीं पोस्ट-डीएलपी अवधि के अंतर्गत 809 मार्गों की कुल 2,484.205 किलोमीटर लंबाई का अनुरक्षण किया जा रहा है।

इन सभी मार्गों के अनुरक्षण कार्यों की निगरानी ई-मार्ग पोर्टल के माध्यम से की जा रही है। पोर्टल के जरिए प्रत्येक दो महीने में जनपदीय पीआईयू के अवर अभियंता अनुरक्षणाधीन मार्गों का निरीक्षण करते हैं।

निरीक्षण के दौरान जियोटैग फोटो पोर्टल पर अपलोड की जाती हैं। इसके बाद सहायक अभियंता और अधिशासी अभियंता निर्धारित 12 मानकों के आधार पर अधिकतम 100 अंकों में मार्गों का मूल्यांकन करते हैं।

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गुणवत्ता जांच में खरे उतरने पर ही होगा भुगतान

विभाग के अनुसार, जिन मार्गों का मूल्यांकन 80 अंक से कम होता है, उनके लिए पोर्टल पर बिल तैयार नहीं किया जाता। इस व्यवस्था से अनुरक्षण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा रही है।

अब तक 3,039 मार्गों का निरीक्षण किया जा चुका है, जिनमें 2,914 मार्ग यानी करीब 96 प्रतिशत मार्ग संतोषजनक पाए गए हैं। वहीं 125 ऐसे मार्ग मिले हैं, जिन पर सुधारात्मक कार्य कराया जा रहा है।

डिजिटल व्यवस्था से बढ़ेगी पारदर्शिता

विभाग ने बताया कि नियमित निरीक्षण, जियोटैगिंग, ऑनलाइन बिलिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए अनुरक्षण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है।

कॉन्ट्रैक्टर की ओर से ई-मार्ग पोर्टल पर मासिक बिल अपलोड किए जाते हैं, जिनकी जांच अभियंताओं द्वारा की जाती है। निर्धारित अनुरक्षण दरों के अनुसार भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

सीसीएल जारी होने के बाद पीआईयू के माध्यम से संबंधित फर्म या कॉन्ट्रैक्टर को भुगतान किया जाता है। विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क को बेहतर, सुरक्षित और सुगम बनाने में मदद मिल रही है।

 

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