इस दीपावली, स्वास्थ्य का उपहार: ‘परंपरा से पोषण’ के माध्यम से गोंडा में माताओं और बच्चों तक पहुँचा पारंपरिक पोषण

गोंडा, 6 नवंबर 2026: दीपावली की तैयारियों के बीच गोंडा में शुक्रवार को 250 कुपोषित माताओं एवं बच्चों को स्वास्थ्य और पोषण का उपहार दिया गया। दोपहर 12:30 बजे जिला पंचायत सभागार में आयोजित वितरण कार्यक्रम के साथ गोंडा ‘परंपरा से पोषण’ अभियान को लागू करने वाला पहला जिला बन गया।
मण्डलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने मंडल में एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य गोंडा, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती में महिलाओं एवं बच्चों के कुपोषण की समस्या से निपटना है। इसी प्रकार के वितरण कार्यक्रम अन्य तीन जिलों में भी आयोजित किए जाएंगे।
पूरे मंडल में 10,842 बच्चों की पहचान गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) अथवा मध्यम तीव्र कुपोषण (MAM) से प्रभावित बच्चों के रूप में की गई है। इस पहल का लक्ष्य इनमें से प्रत्येक बच्चे तक पहुँचना है।
यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मातृ एवं शिशु पोषण को मजबूत करने तथा प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ शुरुआत सुनिश्चित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाती है।
*पारंपरिक खानपान से पोषण की ओर वापसी*
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की अपनी पारंपरिक खाद्य परंपराओं को फिर से प्रोत्साहित करना है।
माताओं को पारंपरिक लोहे की कड़ाही भेंट की गई। भारतीय रसोई में लंबे समय से उपयोग की जाने वाली लोहे की कड़ाही भोजन में आयरन की मात्रा बढ़ाने में सहायक होती है, जिससे एनीमिया (खून की कमी) से बचाव के प्रयासों को मजबूती मिलती है।
इसके साथ ही परिवारों को गुड़, भुना चना और सत्तू भी वितरित किए गए। ये सभी खाद्य पदार्थ सस्ते, पौष्टिक तथा क्षेत्र में पीढ़ियों से उगाए और खाए जाते रहे हैं।
इसके अतिरिक्त कैल्शियम तथा ओआरएस-जिंक के पैकेट भी दिए गए।
माताओं और बच्चों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए फोर्टिफाइड टेक होम राशन (पोषक तत्वों से युक्त घर ले जाने वाला राशन) के रूप में तैयार-करने-योग्य पौष्टिक मिश्रण भी उपलब्ध कराया गया।
*वितरण तक सीमित नहीं, निरंतर निगरानी भी*
मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की परिकल्पना से शुरू हुआ ‘परंपरा से पोषण’ अभियान केवल एक दिन के वितरण कार्यक्रम तक सीमित नहीं है।

इसके अंतर्गत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रत्येक माता और बच्चे की प्रगति पर नजर रखेंगी। आशा कार्यकर्ताओं द्वारा नियमित रूप से घरों का भ्रमण किया जाएगा।
इसके साथ ही वजन, बच्चों की वृद्धि तथा हीमोग्लोबिन स्तर की नियमित अंतराल पर जांच और निगरानी की जाएगी, ताकि इस अभियान की सफलता का आकलन परिवारों के वास्तविक स्वास्थ्य सुधार के आधार पर किया जा सके।
*इस अवसर पर मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने कहा:*
“देवीपाटन मंडल का स्वस्थ भविष्य उसकी माताओं और बच्चों से शुरू होता है। ‘परंपरा से पोषण’ हमारी पारंपरिक ज्ञान-परंपरा और सरकारी व्यवस्था की पहुंच को एक साथ जोड़ता है। दीपावली के अवसर पर इन पोषण किटों का वितरण केवल पहला कदम है। हम प्रत्येक परिवार के साथ तब तक जुड़े रहेंगे, जब तक उनके बच्चों का समुचित विकास नहीं होने लगता और माताएं स्वस्थ नहीं हो जातीं।”
*गोंडा से शुरू हुई पहल, अब अन्य जिलों तक पहुँचेगा अभियान*
मंडलायुक्त ने इस अभियान के अंतर्गत प्रथम वितरण कार्यक्रम की योजना बनाने और सफलतापूर्वक आयोजन करने के लिए गोंडा की जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन एवं उनकी पूरी जिला टीम के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा:
“गोंडा प्रशासन ने यह दिखाया है कि एक सुनियोजित और जन-केंद्रित प्रयास के माध्यम से उन परिवारों तक पहुंचा जा सकता है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। गोंडा ने इस अभियान की अच्छी शुरुआत की है। अब इसे बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती में भी आगे बढ़ाया जाएगा। हमारा उद्देश्य सभी 10,842 कुपोषित बच्चों और उनके परिवारों तक पहुंचना है।”
इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने कहा आंगनवाड़ी एवं आशा कार्यकर्ताओं का भी विशेष आभार व्यक्त किया, जिनके द्वारा क्षेत्र में प्रतिदिन किए जाने वाले कार्यों से इस प्रकार की जनकल्याणकारी पहल सफल हो पाती हैं।
उन्होंने कहा की परंपरा से पोषण’ अभियान को लागू करने से बच्चों एवं महिलाओं को मिल रहा लाभ
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी दयानंद प्रसाद, जिला कार्यक्रम अधिकारी जिला समाज कल्याण अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे
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