‘शांतिदूत’ पाकिस्तान को अमेरिका ने सरेआम दिखाया ठेंगा, होर्मुज में चीन के जहाज बेधड़क निकले, पाक के 2 जहाज खदेड़े

इस्लामाबाद: ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता कराने में बढ़-चढ़कर मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान को वाशिंगटन ने करारा झटका दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के दो जहाजों को अमेरिकी सेना ने बैरंग वापस लौटा दिया है। हैरानी की बात यह है कि अमेरिका ने यह सख्त कदम ऐसे समय उठाया है जब उसी रास्ते से चीन समेत कई अन्य देशों के 20 जहाज बेधड़क होकर गुजरे हैं। अमेरिका की इस एकतरफा कार्रवाई से पाकिस्तान प्रशासन में हड़कंप है और पाकिस्तानी सरकार ने फिलहाल अपनी इस फजीहत पर कोई भी आधिकारिक बयान देने से किनारा कर लिया है।

ईरान से मिले ‘पास’ भी नहीं आए काम
अल अरबिया की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को पाकिस्तानी झंडे लगे दो जहाजों ने जैसे ही होर्मुज से निकलने का प्रयास किया, वहां मुस्तैद अमेरिकी नौसेना ने उनका रास्ता रोक दिया और उन्हें वापस जाने पर मजबूर कर दिया। यह घटना तब हुई जब चीन के जहाज वहां से आसानी से गुजर रहे थे। बता दें कि ईरान ने इस मार्ग से सुरक्षित निकलने के लिए पाकिस्तान को 20 विशेष पास जारी किए थे। पाकिस्तान इनमें से चार पास का पहले ही इस्तेमाल कर चुका है, लेकिन इस बार ईरान की छूट के बावजूद अमेरिका ने उसे जोर का झटका दे दिया है। पाकिस्तान के जहाजरानी विभाग के एक अधिकारी ने चिंता जताते हुए कहा कि जब ईरान ने रास्ता ब्लॉक किया था, तब भी वे इतने परेशान नहीं थे, जितना अब अमेरिका द्वारा अपने जहाजों को वापस खदेड़े जाने के बाद हैं।

पीस डील से ठीक पहले कड़ा संदेश, 10 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात
अमेरिका ने होर्मुज के बाहर सख्त नाकाबंदी की घोषणा करते हुए ओमान की खाड़ी और अरब सागर में अपने 10 हजार सैनिकों का भारी जमावड़ा लगा दिया है। वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस भारी तैनाती और नाकाबंदी के पहले ही दिन 20 जहाज इस समुद्री रास्ते से बिना किसी रुकावट के गुजरे। अमेरिकी सेना ने कुल 6 जहाजों को ही रोका, जिनमें से 2 जहाज सीधे तौर पर पाकिस्तान के थे। पाकिस्तान के जहाजरानी मंत्री जुनैद अनवर चौधरी ने मुश्किलों को स्वीकार करते हुए कहा है कि अन्य देशों की तरह उन्हें भी परेशानी हो रही है और वे समस्या का हल निकालने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। यह घटना पाकिस्तान के लिए इसलिए भी किसी बड़े झटके से कम नहीं है क्योंकि महज दो दिन बाद ही इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण शांति वार्ता होने जा रही है।
