जंतर-मंतर की सुरक्षा पर बड़ा फैसला: अब 18 डीसीपी संभालेंगे मोर्चा, अमित शाह के साथ बैठक के बाद नई रणनीति लागू
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार जारी प्रदर्शनों और हालिया हिंसक घटनाओं के बाद दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। नई रणनीति के तहत अब जंतर-मंतर और उससे जुड़े सभी प्रमुख मार्गों की निगरानी के लिए 18 पुलिस उपायुक्त तैनात किए जाएंगे। गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद इस सुरक्षा योजना को अंतिम रूप दिया गया।
हर प्रमुख मार्ग की जिम्मेदारी संबंधित जिला पुलिस को

नई व्यवस्था के अनुसार, जंतर-मंतर तक पहुंचने वाले सभी प्रमुख मार्गों की सुरक्षा और निगरानी संबंधित जिला पुलिस के जिम्मे होगी। पूरे अभियान की कमान स्पेशल पुलिस आयुक्त के हाथ में रहेगी। पुलिस का मुख्य उद्देश्य भीड़ प्रबंधन, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और यातायात व्यवस्था को सुचारु रखना होगा।
हालिया हिंसा के बाद बदली सुरक्षा रणनीति
दिल्ली पुलिस ने यह फैसला हाल ही में हुए उग्र प्रदर्शन के बाद लिया है। प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा था और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए थे। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इन्हीं घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने का निर्णय लिया गया।
पेलेट गन के आरोपों की जांच करेगी क्राइम ब्रांच
प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोप भी लगाए गए थे। इन आरोपों की जांच अब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है, ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जा सके।

एफआईआर में हत्या की साजिश का भी उल्लेख
कर्तव्य पथ थाना पुलिस में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, 20 जुलाई को रेल भवन और संसद के निकट हुई हिंसा को पुलिस ने सामान्य झड़प नहीं माना है। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला किया और हत्या की नीयत से हिंसक कार्रवाई की। यह एफआईआर मौके पर तैनात एक इंस्पेक्टर की शिकायत पर दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार, घटना में कई जवान घायल हुए और सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा।
क्यों जारी है जंतर-मंतर पर प्रदर्शन?
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में छात्र और युवा नीट-यूजी 2026 सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, जैसे नीट, सीयूईटी और सीबीएसई में कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। इसके अलावा, वे पेपर लीक से प्रभावित या कथित रूप से आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग भी कर रहे हैं।
