भारतीय रेलवे की बड़ी छलांग: ट्रायल पर दौड़ी पहली वंदे भारत फ्रेट ईएमयू, कोटा में 145 किमी/घंटा की रफ्तार से किया परीक्षण
नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने तेज और आधुनिक माल परिवहन की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए देश की पहली वंदे भारत फ्रेट ईएमयू का ट्रायल शुरू कर दिया है। 16 कोच वाली इस अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म आधारित फ्रेट ईएमयू के प्रोटोटाइप का राजस्थान के कोटा मंडल में सफल परीक्षण किया गया। ट्रायल के पहले ही दिन ट्रेन ने 145 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति हासिल कर नई उपलब्धि दर्ज की।
चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में निर्मित इस फ्रेट ट्रेन का उद्देश्य व्यावसायिक संचालन से पहले इसकी गति, ब्रेकिंग प्रणाली, भार वहन क्षमता और समग्र प्रदर्शन का परीक्षण करना है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, परीक्षण के आधार पर ट्रेन के परिचालन से जुड़ी अंतिम तैयारियां पूरी की जाएंगी।

एक महीने तक चलेगा हाई-स्पीड ट्रायल
रेलवे के अनुसार, इस फ्रेट ईएमयू का विस्तृत परीक्षण कोटा-नागदा-सवाई माधोपुर हाई-स्पीड रेल सेक्शन पर एक महीने से अधिक समय तक किया जाएगा। यह मार्ग भारतीय रेलवे के प्रमुख परीक्षण कॉरिडोर में शामिल है।
परीक्षण के दौरान प्रतिदिन अलग-अलग गति और परिचालन परिस्थितियों में कम से कम दो राउंड ट्रिप संचालित किए जाएंगे। पहले दिन कोटा-महिदपुर रोड सेक्शन पर ट्रेन का परीक्षण 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से किया गया। इसके बाद महिदपुर रोड और भवानी मंडी के बीच 120 और 135 किलोमीटर प्रति घंटा की गति पर भी ट्रायल हुआ। वापसी के दौरान ट्रेन ने 145 किलोमीटर प्रति घंटा की शीर्ष गति हासिल की।
तेज माल ढुलाई के लिए तैयार नई तकनीक
रेलवे का कहना है कि इस नई वंदे भारत फ्रेट ईएमयू को ई-कॉमर्स डिलीवरी, एक्सप्रेस पार्सल सेवा, कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स और समयबद्ध माल परिवहन को अधिक तेज और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इसके संचालन से डिलीवरी का समय घटेगा और माल परिवहन की दक्षता में सुधार होगा।

16 कोच वाले इस रेक में दो रेफ्रिजरेटेड वैन, दो नॉन-ड्राइविंग ट्रेलर कोच और 12 पार्सल कोच शामिल हैं। इसकी एक्सल लोड क्षमता 20 टन से अधिक है, जबकि कुल पेलोड क्षमता 397 टन से ज्यादा बताई गई है।
आधुनिक सुरक्षा और उन्नत तकनीक से लैस
वंदे भारत फ्रेट ईएमयू में रेफ्रिजरेटेड पार्सल सुविधा, फोर्स्ड वेंटिलेशन, न्यूमैटिक रिट्रैक्टेबल रोलर फ्लोरिंग, अत्याधुनिक ब्रेकिंग और प्रोपल्शन सिस्टम के साथ कवच स्वचालित टक्कर-रोधी प्रणाली जैसी आधुनिक तकनीकें शामिल की गई हैं।
ट्रायल के दौरान ऑसिलेशन, आपातकालीन ब्रेकिंग, ट्रैक्शन, घुमावदार ट्रैक पर प्रदर्शन, पुनर्योजी ऊर्जा प्रणाली, सिग्नलिंग, दूरसंचार, दरवाजों के संचालन, सीसीटीवी, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा प्रणालियों की भी विस्तृत जांच की जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत ट्रेन की गति 5 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक होते ही सभी दरवाजे स्वतः लॉक हो जाते हैं और जब तक सभी दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं होते, ट्रेन आगे नहीं बढ़ सकती।
