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BBAU का बड़ा संदेश: अफवाहों से रहें दूर, अनुशासन और शैक्षणिक माहौल से कोई समझौता नहीं; 30 छात्रों पर कार्रवाई बरकरार

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत पर विद्यार्थियों और अभिभावकों से सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में अनुशासन, सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण और विधि द्वारा शासन सर्वोच्च प्राथमिकता है। विश्वविद्यालय प्रशासन सभी निर्णय नियमों, तथ्यों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप लेता है तथा विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

विद्यार्थियों के हित सर्वोपरि, हर सुविधा उपलब्ध कराने का दावा

प्रो. राज कुमार मित्तल ने नए विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक प्रयोगशालाओं, छात्रवृत्ति, अनुसंधान, छात्रावास, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों, परामर्श सेवाओं, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, लैंगिक संवेदनशीलता, शिकायत निवारण प्रणाली और सुरक्षित एवं समावेशी परिसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन अनुशासनहीनता, हिंसा, दबाव की राजनीति और विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियां किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।

सोशल मीडिया की भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने की अपील

कुलपति ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से प्रसारित अपुष्ट और भ्रामक जानकारियों पर विश्वास न करें। किसी भी सूचना के लिए केवल विश्वविद्यालय के आधिकारिक माध्यमों पर भरोसा करें।

राष्ट्रीय रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन का उल्लेख

विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि बीबीएयू को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) से A++ ग्रेड प्राप्त है। इसके अलावा NIRF 2025 की विश्वविद्यालय श्रेणी में संस्थान को देश में 37वां तथा समग्र श्रेणी में 69वां स्थान मिला है। वहीं IIRF 2026 की केंद्रीय विश्वविद्यालय रैंकिंग में बीबीएयू ने 19वां स्थान हासिल किया है।

छात्रा की मौत के मामले का किया जिक्र

विश्वविद्यालय ने बताया कि 26 अप्रैल 2026 की रात एक छात्रा का निधन हो गया था, जो मूल रूप से वाराणसी की निवासी थी और 20 अप्रैल को अपने परिजनों के साथ वाराणसी चली गई थी। छात्रावास के रिकॉर्ड के अनुसार उसने 9 अप्रैल के बाद मेस में भोजन नहीं किया था। छात्रा की मृत्यु के बाद 28 अप्रैल की रात कुछ विद्यार्थियों द्वारा कुलपति आवास का घेराव, तोड़फोड़ और विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुई थीं।

मेडिकल रिपोर्ट में निमोनिया और सांस संबंधी परेशानी बनी मौत की वजह

विश्वविद्यालय के अनुसार अनुशासन समिति को उपलब्ध कराए गए चिकित्सीय अभिलेखों और मेडिकल रिपोर्ट में छात्रा की मृत्यु का कारण निमोनिया और श्वास संबंधी दिक्कतें पाया गया। प्रशासन का कहना है कि कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर छात्रा की मौत को छात्रावास के भोजन से हुई कथित फूड पॉइजनिंग से जोड़ने का प्रयास किया, जबकि उपलब्ध चिकित्सीय साक्ष्य इसकी पुष्टि नहीं करते।

सीसीटीवी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर हुई जांच

विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक अनुशासन समिति ने पूरे मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच की। इस दौरान सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग, फोटोग्राफ, दस्तावेजी साक्ष्य, सुरक्षाकर्मियों के बयान और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की जांच की गई। समिति ने संबंधित विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया और सभी तथ्यों के परीक्षण के बाद सर्वसम्मति से अपनी संस्तुतियां प्रस्तुत कीं।

26 वर्तमान और 4 पूर्व विद्यार्थियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई

अनुशासन समिति की सिफारिशों और विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार 26 वर्तमान तथा 4 पूर्व विद्यार्थियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने संबंधित विद्यार्थियों पर आर्थिक दंड लगाया है, हालांकि कई विद्यार्थियों द्वारा अब तक जुर्माना जमा नहीं किया गया है। इसके अलावा नियमानुसार उनके विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। कुछ विद्यार्थियों को एक सप्ताह तथा कुछ को उससे अधिक अवधि के लिए निलंबित भी किया गया है।

पुरानी तोड़फोड़ की घटना से जुड़े मामलों का भी उल्लेख

विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में ऐसे विद्यार्थी भी शामिल हैं जिनकी भूमिका 17 सितंबर 2025 को कुलपति कार्यालय में हुई तोड़फोड़ और विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटना में भी पाई गई थी। प्रशासन ने दोहराया कि हिंसा, तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

अधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की अपील

विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें और केवल विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं को ही प्रमाणिक मानें। साथ ही विद्यार्थियों से अनुशासन, शैक्षणिक मर्यादा और सौहार्द बनाए रखते हुए विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखने में सहयोग करने का आग्रह किया गया।

 

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