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रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय में मंकीपॉक्स (एमपॉक्स) पर व्यापक अध्ययन: वैश्विक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण शोध

बरेली,03 जून। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली के संकाय सदस्य डॉ. अमित वर्मा एवं उनके सहयोगियों द्वारा किए गए अत्याधुनिक शोध को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘जर्नल ऑफ हेल्थ, पॉपुलेशन एंड न्यूट्रिशन’ (स्प्रिंगर नेचर) में प्रकाशन हेतु स्वीकार किया गया है। यह शोध मंकीपॉक्स (एमपॉक्स) वायरस के बढ़ते वैश्विक खतरे पर एक व्यापक और अद्यतन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

यह अध्ययन वर्ष 2022 से 2025 तक फैले वैश्विक प्रकोप के दौरान मंकीपॉक्स वायरस की महामारी विज्ञान, आनुवंशिक संरचना, संचरण मार्गों, नैदानिक लक्षणों एवं उपचार विकल्पों की गहन समीक्षा करता है। शोध में वायरस के तीन प्रमुख क्लेड (क्लेड I, IIa और IIb) की तुलना, उनके उत्परिवर्तन, तथा मानव-से-मानव संचरण की बढ़ती क्षमता पर प्रकाश डाला गया है।

शोध की मुख्य विशेषताएं:

· महामारी विज्ञान विश्लेषण: 2022 से मार्च 2025 तक 127 देशों में 137,892 पुष्ट मामलों का वैश्विक डेटा विश्लेषण। अमेरिका (49.7%), अफ्रीका (23.4%) और यूरोप (21.4%) सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र।
· आनुवंशिक अध्ययन: वायरस के ~200 kb जीनोम में 190 ORFs की पहचान, उत्परिवर्तन और अनुकूलन क्षमता का विस्तृत विवरण।
· निदान में प्रगति: PCR, CRISPR-आधारित परीक्षण, LAMP तथा पोर्टेबल पॉइंट-ऑफ-केयर डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म की प्रभावशीलता।
· उपचार और टीके: Tecovirimat, Brincidofovir जैसी एंटीवायरल दवाओं तथा JYNNEOS और ACAM2000 टीकों की भूमिका का मूल्यांकन।
· भविष्य की रणनीति: ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण, वैश्विक निगरानी नेटवर्क, और संसाधन-सीमित क्षेत्रों में टीके/दवाओं की समान पहुंच की आवश्यकता पर बल।

डॉ. अमित वर्मा (महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय) ने इस शोध के महत्व पर कहा:

“मंकीपॉक्स अब केवल अफ्रीका तक सीमित नहीं है; यह वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल बन चुका है। हमारे अध्ययन से स्पष्ट है कि वायरस लगातार उत्परिवर्तित हो रहा है, और स्पर्शोन्मुख (asymptomatic) संक्रमण इसके प्रसार को और कठिन बना रहे हैं। समय पर निदान, तीव्र टीकाकरण अभियान, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही इस महामारी को नियंत्रित कर सकते हैं।”

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने अपने संदेश के माध्यम से कहा कि, “मैं डॉ. अमित वर्मा एवं उनकी पूरी शोध टीम को इस उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ। यह शोध न केवल वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए मूल्यवान है, बल्कि भारत जैसे विकासशील देशों में स्वास्थ्य नीति निर्माण के लिए भी दिशानिर्देश प्रदान करता है। हमारा विश्वविद्यालय ऐसे अत्याधुनिक शोध को सदैव प्रोत्साहित करता रहेगा, जिसका प्रत्यक्ष लाभ समाज और मानवता को हो। यह अध्ययन ‘वन हेल्थ-वन वर्ल्ड’ अवधारणा को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

यह शोध मंकीपॉक्स के खिलाफ वैश्विक तैयारियों को मजबूत करने, नए टीकों और दवाओं के विकास, तथा महामारी रोकथाम के लिए ठोस रणनीति बनाने में सहायक होगा।

शोधकर्ता टीम: डॉ. अमित वर्मा (मुख्य शोधकर्ता), डॉ. संदीप शर्मा, डॉ. गोपाल लाल खाटिक, डॉ. आशीष सुट्टी, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. नीरज चौधरी, डॉ. सुरेश बाबू कोंडावीती

प्रकाशन: Journal of Health, Population and Nutrition (Springer Nature), 2026

बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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