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उत्तर प्रदेश स्टेट एलाइड एंड हेल्थ केयर काउंसिल का गठन, स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुधार की बड़ी पहल

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में एलाइड और हेल्थ केयर शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित और मानकीकृत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश स्टेट एलाइड एंड हेल्थ केयर काउंसिल के गठन के बाद चयनित सदस्यों ने एसजीपीजीआई के पद्मश्री निदेशक डॉ. आर. के. धीमान से शिष्टाचार भेंट की और उन्हें पौधा भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

चिकित्सा शिक्षा विभाग के माध्यम से गठित इस परिषद में विभिन्न स्वास्थ्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। कम्युनिटी केयर बिहेवियर हेल्थ साइंस एंड अदर प्रोफेशनल श्रेणी से पूर्व सुपरवाइजिंग ऑफिसर एमएसओ एसजीपीजीआई श्री राजेश प्रताप सिंह को सदस्य बनाया गया है। वहीं ट्रॉमा, बर्न केयर सर्जरी और एनेस्थीसिया रिलेटेड टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल श्रेणी से श्री राजीव सक्सेना और श्री धीरज सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है। न्यूट्रीशन साइंस प्रोफेशनल के रूप में डॉ. शिल्पी त्रिपाठी को शामिल किया गया है, जबकि मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट और फिजिशियन एसोसिएट श्रेणी से एसजीपीजीआई के पूर्व चीफ टेक्निकल ऑफिसर विनय प्रताप सिंह को सदस्य नामित किया गया है।

2021 में संसद से पारित हुआ था राष्ट्रीय कानून

नेशनल काउंसिल फॉर एलाइड हेल्थ केयर प्रोफेशनल बिल 24 मार्च 2021 को संसद से पारित हुआ था, जबकि इसका गजट नोटिफिकेशन 28 मार्च 2021 को जारी किया गया था। इसी के अनुपालन में उत्तर प्रदेश में 17 फरवरी 2023 को इसका गजट जारी किया गया। इसके बाद 28 जुलाई 2025 को डॉ. कमल पंत को परिषद का प्रथम चेयरमैन नामित किया गया और 9 अप्रैल 2026 को पूर्ण समिति का गठन किया जा सका।

काउंसिल में प्रदेश के विभिन्न जिलों से विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है, जो परिषद को अपने अनुभव और मार्गदर्शन से सहयोग प्रदान करेंगे।

57 पाठ्यक्रमों के संचालन पर रहेगा कड़ा नियंत्रण

राष्ट्रीय परिषद द्वारा 17 पाठ्यक्रमों के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। राज्य परिषद की प्रमुख जिम्मेदारी इन्हीं मानकों का अक्षरश: पालन सुनिश्चित कराना होगी। इसके साथ ही शैक्षणिक गतिविधियों, शिक्षकों की उपलब्धता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन की निगरानी भी परिषद के दायित्व में शामिल रहेगी।

नई व्यवस्था के तहत प्रशिक्षण आधारित लगभग 57 पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इनमें बैचलर डिग्री के साथ-साथ चार पाठ्यक्रमों में डिप्लोमा जारी रखने की अनुमति भी राष्ट्रीय परिषद द्वारा प्रदान की गई है।

छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ पर लगेगी रोक

अब तक कई विश्वविद्यालयों और निजी कॉलेजों द्वारा निर्धारित मानकों का पालन किए बिना केवल औपचारिकताएं पूरी कर पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे थे, जिससे छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। नई परिषद के गठन के बाद ऐसे संस्थानों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि जिस प्रकार नर्सिंग काउंसिल ने स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था में अपनी उपयोगिता और दक्षता स्थापित की है, उसी तरह आने वाले वर्षों में एलाइड एंड हेल्थ केयर काउंसिल भी प्रदेश में स्वास्थ्य शिक्षा को नई दिशा देने का काम करेगी। इससे न केवल छात्रों को लाभ मिलेगा बल्कि आम जनता को भी बेहतर प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध हो सकेंगे।

उत्तर प्रदेश ने दिखाई पहल, कई राज्य अब भी पीछे

प्रदेश में काउंसिल के गठन को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि अभी देश के 17 राज्यों में इसका नोटिफिकेशन तक जारी नहीं हो पाया है। इनमें दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख क्षेत्र भी शामिल हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश द्वारा इस दिशा में उठाया गया कदम अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण माना जा रहा है।

 

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