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खाड़ी में संकट गहराया तो भारत पर पड़ेगा असर, 10 अरब डॉलर तक का नुकसान संभव, मुख्य आर्थिक सलाहकार ने दी चेतावनी

वॉशिंगटन : खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक व्यवधान जारी रहने की स्थिति में भारत (India) में आने वाले धन (Remittances) पर दबाव पड़ सकता है। इससे 10 अरब डॉलर ($10 Billion) तक का संभावित नुकसान हो सकता है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने बुधवार को यह बात कही।

अनंत नागेश्वरन ‘अमेरिका-भारत आर्थिक मंच- 2026’ को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने प्रमुख मेजबान देशों में भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक मंदी के कारण विदेश से आने वाले पैसे की संवेदनशीलता पर प्रकाश डाला। भारत को 2024-25 में लगभग 124 अरब डॉलर की रेमिटेंस प्राप्त हुई। इससे यह भारत दुनिया में सबसे ज्यादा रेमिटेंस प्राप्त करने वाले देशों में से एक बन गया। इसमें से लगभग आधा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीय कामगारों से आया।

उन्होंने कहा, सामान्य आर्थिक गतिविधियों को बहाल होने में जितना समय लगेगा, खाड़ी देशों में काम करने वाले श्रमिकों की ओर से भेजे जाने वाले धन पर इसका कुछ न कुछ प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने अनुमान लगाया कि व्यवधान की अवधि और गंभीरता के आधार पर संभावित असर पांच अरब डॉलर से 10 अरब डॉलर तक हो सकता है। नागेश्वरन ने कहा कि ये जोखिम कई कारकों से पैदा होते हैं, जिनमें संघर्ष के कारण श्रमिकों की वापसी, मेजबान देशों में धीमी आर्थिक गतिविधि और रोजगार की स्थिति के बारे में अनिश्चितता शामिल है।

खाड़ी क्षेत्र भारतीय प्रवासी कामगारों के लिए बड़ा केंद्र है। यहां निर्माण, सेवा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग काम करते हैं। अगर परेशानी लंबी चली, तो उनकी कमाई घट सकती है और काम पर लौटने में देरी हो सकती है। यह चिंता ऐसे समय आई है, जब दुनिया में पहले से अनिश्चितता है। व्यापार, ऊर्जा बाजार और पूंजी प्रवाह पर असर पड़ रहा है। नागेश्वरन ने कहा कि रेमिटेंस उन चार बड़े माध्यमों में से एक है, जिनसे बाहरी झटके भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। फिर भी भारत की स्थिति मजबूत है। विदेशी मुद्रा भंडार अच्छा है और आय के स्रोत भी अलग-अलग हैं।

उन्होंने कहा, हम इस स्थिति में मजबूत आर्थिक आधार के साथ प्रवेश कर रहे हैं। भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी प्रवासी आबादी है। लाखों भारतीय विदेश में काम करते हैं। खाड़ी सहयोग परिषद के देश इस आबादी का बड़ा हिस्सा रखते हैं। इसलिए यह क्षेत्र भारत के लिए बहुत अहम है।

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