Thursday, September 24, 2026
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बीबीएयू में हिंदी से रोजगार के अवसरों पर व्याख्यान, विद्यार्थियों को कौशल विकास और बहुभाषिकता का महत्व बताया

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में 22 सितंबर को हिंदी प्रकोष्ठ की ओर से ‘राजभाषा हिंदी उत्सव-2026’ के तहत आयोजित ‘सप्त दिवसीय हिंदी कार्यशाला’ में ‘हिंदी में रोजगार के विविध अवसर, संभावनाएं एवं चुनौतियां’ विषय पर विशेष व्याख्यान हुआ। कार्यक्रम में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. हरीश कुमार शर्मा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव और डॉ. संध्या दीक्षित भी मौजूद रहीं।

अंगवस्त्रम और स्मृति चिन्ह भेंट कर किया स्वागत

कार्यक्रम की शुरुआत आयोजन समिति की ओर से मुख्य वक्ता प्रो. हरीश कुमार शर्मा को अंगवस्त्रम और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत एवं आभार व्यक्त करने के साथ हुई। इसके बाद उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के माध्यम से उपलब्ध रोजगार के अवसरों और इससे जुड़ी चुनौतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

डिग्री के साथ कौशल विकास और निरंतर प्रयास जरूरी

प्रो. शर्मा ने कहा कि मौजूदा समय में उच्च शिक्षा और डिग्री के साथ कौशल विकास, निरंतर प्रयास और सही दिशा में काम करना भी जरूरी है। उन्होंने साहित्यिक और पौराणिक उदाहरणों के जरिए विद्यार्थियों को समझाया कि रोजगार और जीवन में संघर्ष की चुनौतियां नई नहीं हैं।

उन्होंने प्रेमचंद, यशपाल, द्रोणाचार्य और कर्ण के उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को कठिन परिस्थितियों को चुनौती के रूप में स्वीकार करने और अपनी योग्यता व प्रतिभा को अवसर में बदलने के लिए प्रेरित किया।

हिंदी के साथ भारतीय भाषाओं और बहुभाषिकता पर जोर

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प्रो. शर्मा ने हिंदी के साथ अन्य भारतीय भाषाओं और बहुभाषिकता के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि टेलीविजन, सिनेमा, पर्यटन, रोजगार और डिजिटल माध्यमों ने हिंदी को हिंदीतर क्षेत्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने विद्यार्थियों को अन्य भारतीय भाषाओं के सामान्य शब्दों और अभिव्यक्तियों को सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि सामाजिक संबंधों और आपसी आत्मीयता को मजबूत करने का साधन भी है।

सभी भाषाओं के प्रति सम्मान की अपील

प्रो. शर्मा ने अंग्रेजी सहित सभी भाषाओं के प्रति सम्मान की दृष्टि विकसित करने की बात कही। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी को रोजगार, सृजन, संचार और व्यावसायिक विकास के माध्यम के रूप में अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न शिक्षक, गैर-शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

 

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