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PoK में प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग से 40 से ज्यादा मौतें! भारत ने उठाए सवाल, अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग

इस्लामाबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना की कथित फायरिंग में 40 से अधिक लोगों की मौत के मामले पर भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। भारत ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पाकिस्तान की ओर से दिए गए बयानों ने यह स्वीकार किया है कि भारत में हिंसा फैलाने के लिए मुजाहिदीनों को प्रशिक्षण और हथियार उपलब्ध कराए गए थे।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि पीओके में प्रदर्शनकारियों पर हुई फायरिंग में 40 से अधिक लोगों की जान गई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने इन लोगों को अपना दुश्मन बताया, जबकि राजनीतिक मामलों पर प्रधानमंत्री के विशेष सहायक ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि जिन मुजाहिदीनों को पाकिस्तान सरकार ने प्रशिक्षण और हथियार देकर भारत में खून बहाने के लिए भेजा था, अब वही लोग पाकिस्तान के खिलाफ उनका इस्तेमाल कर रहे हैं। जैसवाल ने कहा कि इस बयान से पाकिस्तान ने अपनी गतिविधियों की स्वयं पुष्टि कर दी है।

पीओके में सुरक्षाबलों पर बल प्रयोग के आरोप

पीओके में हालात को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती बताई जा रही है। आरोप लगाए गए हैं कि सुरक्षाबल शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग कर रहे हैं। साथ ही यह भी दावा किया गया कि लोगों की मौत हो रही है और मीडिया पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और पाकिस्तान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

रावलकोट निवासी सरदार अमन खान कश्मीरी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अकील ने जारी बयान में आरोप लगाया कि पाकिस्तान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ बल प्रयोग कर रहा है। दोनों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से घटनास्थल की वास्तविक स्थिति दुनिया के सामने लाने की अपील की।

‘प्रदर्शनकारियों को आतंकी बताया जा रहा’

सरदार अमन खान ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को आतंकी करार दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान रेंजर्स, फ्रंटियर कॉर्प्स और अन्य सुरक्षाबल घरों की छतों पर तैनात हैं और निर्दोष लोगों को निशाना बना रहे हैं। उनका यह भी आरोप है कि राष्ट्रीय सुरक्षा में इस्तेमाल होने वाले घातक हथियारों का उपयोग निहत्थे नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

रूसी सेना में फंसे भारतीयों पर भी विदेश मंत्रालय का बयान

एक अन्य सवाल के जवाब में रणधीर जैसवाल ने बताया कि रूसी सेना से अब तक 139 भारतीयों की रिहाई हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अभी भी 24 भारतीय वहां मौजूद होने की जानकारी है और भारत सरकार उनकी सुरक्षित रिहाई के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

पीओके के कानूनी नाम को लेकर भारत का रुख दोहराया

अमेरिकी समाचार पत्र की उस रिपोर्ट पर, जिसमें पीओके को पाकिस्तानी कश्मीर बताया गया था, विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मीडिया संस्थानों को कानूनी रूप से सही नामों का इस्तेमाल करना चाहिए। मंत्रालय ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग हैं, थे और हमेशा रहेंगे।

 

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