एमजेपी रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय में एंटी रैगिंग दिवस का आयोजन एवं एंटी रैगिंग सप्ताह का शुभारंभ

बरेली, 12 अगस्त। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली में प्रॉक्टोरियल बोर्ड एवं एंटी रैगिंग समिति के संयुक्त तत्वावधान में एंटी रैगिंग दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके साथ ही विश्वविद्यालय में 12 से 18 अगस्त 2026 तक आयोजित होने वाले एंटी रैगिंग सप्ताह की गतिविधियाँ भी प्रारंभ हो गईं।

विश्वविद्यालय के मुख्य कुलानुशासक प्रो. रवेन्द्र सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का परिसर गुरुकुल की भाँति अनुशासित, सुरक्षित और संस्कारपूर्ण होना चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन अनुशासन एवं विद्यार्थियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देता है। विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मी भी विद्यार्थियों को सुरक्षित और सहयोगात्मक वातावरण प्रदान करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी कनिष्ठ विद्यार्थी को वरिष्ठ विद्यार्थी से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन परिसर में भय अथवा असुरक्षा का वातावरण उत्पन्न नहीं होने देगा। प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम में 22 प्रॉक्टर्स हैं, जो परिसर में अनुशासन और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर सक्रिय एवं सतर्क रहते हैं।
प्रो. सिंह ने विद्यार्थियों को आगाह किया कि रैगिंग अथवा किसी भी प्रकार की अनुशासनहीन गतिविधि में संलिप्त पाए जाने पर दोषी विद्यार्थी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा सकती है। इसमें विश्वविद्यालय से निष्कासन, चरित्र प्रमाणपत्र में प्रतिकूल टिप्पणी तथा गंभीर मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराना भी शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि रैगिंग के शैक्षणिक, सामाजिक, मानसिक और कानूनी स्तर पर अत्यंत गंभीर दुष्परिणाम हो सकते हैं।
यातायात नियमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से वाहन चलाते समय वैध ड्राइविंग लाइसेंस एवं अन्यध आवश्यक दस्तावेज अपने साथ रखने तथा सभी सुरक्षा नियमों का पालन करने का आह्वान किया। नियमों का उल्लंघन करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने वरिष्ठ विद्यार्थियों से कहा कि वे कनिष्ठ विद्यार्थियों के साथ बड़े भाई-बहन की तरह व्यवहार करें, उनकी समस्याओं को समझें तथा उन्हें आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान करें। मुख्य कुलानुशासक कार्यालय विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान और आवश्यक दस्तावेज संबंधी सहायता के लिए सदैव उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि शिक्षक एवं गुरुजन विद्यार्थियों की चिंता करते हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रयासरत रहते हैं। विद्यार्थियों से भी अपेक्षा है कि वे अपने शिक्षकों का सम्मान करें, उनका सहयोग करें तथा विश्वविद्यालय की गरिमा बनाएं।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो. संतोष अरोड़ा ने कहा कि रैगिंग के कारण कई बार जीवन की हानि तक हो जाती है। रैगिंग मूलतः एक नकारात्मक मानसिकता का परिणाम है, जिसमें वरिष्ठ विद्यार्थी यह मानने लगता है कि सीनियर हो जाने के बाद उसे कनिष्ठ विद्यार्थियों का परिचय लेने का अधिकार प्राप्त हो गया है।
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उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि भय और दबाव के माध्यम से परिचय लेने के स्थान पर प्रेम, सम्मान और आत्मीयता के साथ एक-दूसरे को जानना चाहिए। ऐसा परिचय न केवल स्मरणीय बनता है, बल्कि वरिष्ठ और कनिष्ठ विद्यार्थियों के बीच प्रेम, सहयोग और सौहार्द पर आधारित ऐसा संबंध विकसित करता है, जो जीवनभर बना रह सकता है।
प्रो. अरोड़ा ने कहा कि रैगिंग किसी प्रकार के मनोरंजन अथवा आनंद का माध्यम नहीं है। वरिष्ठ विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि कनिष्ठ विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय परिसर या छात्रावास में रहने, अध्ययन करने तथा समायोजन स्थापित करने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। वरिष्ठ और कनिष्ठ विद्यार्थियों के बीच का संबंध पारस्परिक सम्मान, सहयोग और संवेदनशीलता पर आधारित होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एंटी रैगिंग दिवस एवं एंटी रैगिंग सप्ताह के आयोजन का प्रमुख उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर को पूर्णतः रैगिंगमुक्त बनाना है। विश्वविद्यालय में रैगिंग के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। रैगिंग करना और रैगिंग सहना—दोनों ही अनुचित हैं। यदि किसी विद्यार्थी के साथ रैगिंग की जाती है अथवा कोई विद्यार्थी ऐसी घटना का साक्षी बनता है, तो उसे बिना भय के तत्काल विश्वविद्यालय प्रशासन को इसकी सूचना देनी चाहिए।
विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर डॉ. राम बाबू सिंह ने उपस्थित विद्यार्थियों को एंटी रैगिंग प्रतिज्ञा दिलाई। उन्होंने विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की रैगिंग या अनुशासनहीन गतिविधि में संलग्न न होने तथा रैगिंगमुक्त परिसर के निर्माण में सक्रिय सहयोग देने की सलाह दी।
कार्यक्रम का संचालन एंटी रैगिंग समिति की नोडल अधिकारी डॉ. मीनाक्षी द्विवेदी ने किया। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से परस्पर सम्मान, सहयोग और सौहार्द की भावना के साथ विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखने का आह्वान किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर्स डॉ. आभा त्रिवेदी, डॉ. पूजा यादव, डॉ. इरम, डॉ. पंकज, डॉ. रश्मि रंजन, डॉ. अख्तर हुसैन तथा डॉ. दीपक गंगवार सहित शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

