मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाला यह लगभग 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेस- वे


अपने साथ विकास की एक नई कहानी भी लेकर आ रहा है। राज्य सरकार ने इस पूरे मार्ग के साथ-साथ 12 जिलों मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज में 11 औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य है कि एक्सप्रेस-वे के आसपास के ग्रामीण इलाकों में उद्योग, लॉजिस्टिक्स और कृषि आधारित कारोबार को बढ़ावा मिले और लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें।
मेरठ जिले में जहां से यह एक्सप्रेस-वे शुरू होता है, वहां के आसपास के गांव जैसे किठौर, माछरा और सरधना क्षेत्र अब औद्योगिक गतिविधियों के नए केंद्र बनने की ओर बढ़ रहे हैं। यहां प्रस्तावित औद्योगिक कॉरिडोर में छोटे उद्योग, वेयरहाउसिंग और ट्रांसपोर्ट हब विकसित किए जाने की योजना है।
हापुड़ और बुलंदशहर जिलों में सिकंदराबाद, स्याना और गुलावठी के आसपास के इलाके पहले से ही औद्योगिक संभावनाओं के लिए जाने जाते हैं। यहां बनने वाले औद्योगिक कॉरिडोर में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक पार्क विकसित किए जाएंगे। दिल्ली-एनसीआर की नजदीकी के कारण इन इलाकों में निवेश की संभावनाएं और भी ज्यादा बढ़ गई हैं। इससे छोटे कस्बों और गांवों में आर्थिक गतिविधियों का नया दौर शुरू होने की उम्मीद है।
अमरोहा और संभल जिलों के धनौरा, असमोली और चंदौसी जैसे इलाकों में कृषि आधारित उद्योगों को

बढ़ावा देने की योजना है। यहां के किसान गन्ना, गेहूं और सब्जियों की खेती करते हैं। अगर फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और कोल्ड स्टोरेज चेन विकसित होती है, तो किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलेगा और गांवों में ही रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
बदायूं और शाहजहांपुर के ग्रामीण इलाके जैसे दातागंज, बिसौली, जलालाबाद और तिलहर अब तक मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर रहे हैं। लेकिन प्रस्तावित औद्योगिक कॉरिडोर के तहत यहां लॉजिस्टिक पार्क, ट्रक टर्मिनल और वेयरहाउसिंग हब बनाए जाने की योजना है। इससे इन इलाकों की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाते हुए माल ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन को मजबूत किया जा सकेगा।
हरदोई और उन्नाव में संडीला, बांगरमऊ और सफीपुर जैसे कस्बों के आसपास औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार प्रस्तावित है। यहां छोटे उद्योगों के साथ-साथ टेक्सटाइल और कृषि यूनिट की संभावना देखी जा रही है। इससे आसपास के गांवों में रहने वाले युवाओं को बड़े शहरों की ओर पलायन करने की जरूरत कम हो सकती है।
रायबरेली और प्रतापगढ़ में लालगंज, कुंडा और पट्टी के आसपास बनने वाले औद्योगिक क्लस्टर इस पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नया आधार दे सकते हैं। यहां डेयरी, फूड प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्योगों के साथ-साथ लॉजिस्टिक सुविधाएं विकसित होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी।
प्रयागराज जिले में जहां एक्सप्रेस-वे का अंतिम बिंदु होगा, वहां हंडिया और फूलपुर के आसपास औद्योगिक और लॉजिस्टिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र विकसित किया जा सकता है। यहां से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार तक सामान की आवाजाही तेज और आसान होगी।
इस औद्योगिक कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि विकास सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि गांवों और छोटे कस्बों तक पहुंचेगा। जब किसी इलाके में सड़क, उद्योग, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक पार्क एक साथ विकसित होते हैं, तो वहां नई आर्थिक गतिविधियां जन्म लेती हैं छोटे कारोबार, ट्रांसपोर्ट सेवाएं, होटल-ढाबे और स्थानीय बाजार तेजी से बढ़ते हैं। गंगा एक्सप्रेस-वे के साथ प्रस्तावित ये औद्योगिक कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक शक्ति में बदलने दम रखते हैं।
