वोटर लिस्ट से नाम कटा तो भड़के राघव चड्ढा, AAP पर लगाया राजनीतिक बदले का आरोप; पार्टी बोली- SIR में सरकार की कोई भूमिका नहीं
चंडीगढ़: पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम हटाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी और उनके बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। चड्ढा ने आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की गई है। वहीं आम आदमी पार्टी ने उनके आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है और इसमें पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम के आगे दर्ज है ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’

13 अगस्त 2026 को जारी पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में राघव चड्ढा के नाम के सामने ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ दर्ज किया गया है। उनका नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरे नाम वाले मतदाताओं की सूची में शामिल किया गया है। विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत पंजाब में अब तक 20.66 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं। यह संख्या पुनरीक्षण से पहले राज्य के कुल मतदाताओं की करीब 9.7 प्रतिशत है।
चड्ढा का आरोप- पंजाब सरकार के अधिकारी प्रक्रिया में शामिल
मोहाली में पंजीकृत अपने मतदाता पहचान पत्र का हवाला देते हुए राघव चड्ढा ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर प्रशासनिक तंत्र और पुलिस के कथित इस्तेमाल का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कागजी या लिपिकीय गलती नहीं है। चड्ढा का दावा है कि उन्हें ‘स्थानांतरित’ के रूप में दर्ज करने से लेकर सत्यापन और उच्च स्तर पर प्रक्रिया पूरी करने तक पंजाब सरकार के अधिकारी इसमें शामिल रहे।
चड्ढा ने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले बूथ स्तर के अधिकारी से लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक पूरी प्रक्रिया में पंजाब सरकार के कर्मचारी और अधिकारी जुड़े हुए हैं। उनका आरोप है कि चुनावी ड्यूटी समाप्त होने के बाद भी अधिकारियों के तबादले, नियुक्ति और करियर पर राज्य सरकार का प्रभाव रहता है और इसी प्रशासनिक दबाव का इस्तेमाल उनके खिलाफ राजनीतिक बदले के लिए किया जा रहा है।
AAP छोड़ने वाले नेताओं को निशाना बनाने का लगाया आरोप
राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि उनके और अन्य नेताओं के आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी नेतृत्व बौखलाया हुआ है। उन्होंने दावा किया कि जो पूर्व नेता चुप रहने को तैयार नहीं हैं, उनके खिलाफ पंजाब पुलिस और प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है। चड्ढा ने यह भी आरोप लगाया कि दूसरे पूर्व आम आदमी पार्टी सांसदों और नेताओं को भी इसी तरह निशाना बनाया जा रहा है।
SIR की धारा 4(d) का हवाला देकर उठाए सवाल
राघव चड्ढा ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण संबंधी गाइडलाइन के पैरा 4(d) का हवाला दिया। उनका कहना है कि इसमें जनप्रतिनिधियों के लिए ‘संरक्षित सूची’ का प्रावधान है, जिसमें न्यायाधीशों, सांसदों और विधायकों जैसे जनप्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
चड्ढा के मुताबिक, किसी जनप्रतिनिधि का नाम डेटाबेस में चिन्हित होने के बावजूद उसे ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में बनाए रखना जरूरी है, ताकि दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान संबंधित दस्तावेज जमा किए जा सकें। उनका आरोप है कि मौजूदा सांसद होने के बावजूद उनके मामले में इन निर्देशों का जानबूझकर पालन नहीं किया गया।
अक्टूबर में आएगी अंतिम सूची, नाम जुड़वाने की प्रक्रिया जारी
चड्ढा ने कहा कि अभी सामने आई सूची अंतिम मतदाता सूची नहीं है। अंतिम वोटर लिस्ट अक्टूबर 2026 में जारी की जाएगी। उन्होंने बताया कि दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया के तहत वह अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। चड्ढा ने कहा कि पंजाब में सरकार भले ही आम आदमी पार्टी की हो, लेकिन राज्य की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट उसकी निजी संपत्ति नहीं है।
AAP का पलटवार- चुनाव आयोग करता है SIR, सरकार का कोई दखल नहीं
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राघव चड्ढा के आरोपों पर आम आदमी पार्टी ने पलटवार किया है। पार्टी ने एक राष्ट्रीय अंग्रेजी समाचार पत्र की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि चड्ढा खुद दिल्ली में पिछली तारीख से अपना मतदाता पंजीकरण कराने का प्रयास कर रहे हैं और इसमें असफल रहने के बाद पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
पार्टी ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग कराता है और इसमें राज्य सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता। आम आदमी पार्टी के मुताबिक मतदाता सूची में किसका नाम जोड़ा जाएगा और किसका नाम हटाया जाएगा, यह तय करने में पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
AAP बोली- पंजाब में नहीं रहते तो वोटर पंजीकरण की जिम्मेदारी भी आपकी
आम आदमी पार्टी ने दावा किया कि सार्वजनिक रिकॉर्ड के मुताबिक राघव चड्ढा दिल्ली में रहते हैं, पंजाब में नहीं। पार्टी का कहना है कि ऐसे में पंजाब की मतदाता सूची में अपना पंजीकरण बनाए रखना या उसे किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित कराना उनकी अपनी जिम्मेदारी थी। आम आदमी पार्टी ने कहा कि इसके लिए पंजाब सरकार या पार्टी को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
राजेंद्र नगर से बैकडेट में नाम जुड़वाने की कोशिश का AAP का दावा
आम आदमी पार्टी ने यह भी दावा किया कि उसे चुनाव आयोग के सूत्रों से जानकारी मिली है कि राघव चड्ढा दिल्ली के राजेंद्र नगर से पिछली तारीख में प्रक्रिया पूरी कर अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाने का प्रयास कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि यदि किसी तरह की गैरकानूनी या पिछली तारीख की प्रविष्टि कराई गई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और पूरा सच जनता के सामने आना चाहिए।
AAP नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि भाजपा या किसी अन्य व्यक्ति ने ऐसी पिछली तारीख की प्रविष्टि कराने में मदद की है तो पार्टी मामले को उसके अंजाम तक ले जाएगी।
2022 में पंजाब से राज्यसभा पहुंचे थे राघव चड्ढा
राघव चड्ढा वर्ष 2022 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर पंजाब से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। इसके बाद अप्रैल 2026 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी।
12 सितंबर तक नाम दोबारा जुड़वाने का मौका
चुनाव आयोग के मुताबिक ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया जारी है। जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, वे 12 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। इस दौरान मतदाता फॉर्म 6 भरकर अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन किया जा सकता है।

