अलीगढ़ में रोहिंग्या नेटवर्क की जांच तेज, मीट इंडस्ट्री, तस्करी और विदेशी फंडिंग कनेक्शन खंगाल रहीं एजेंसियां
अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में रोहिंग्या नेटवर्क को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी बढ़ा दी है। खुफिया एजेंसियां मीट एक्सपोर्ट उद्योग से जुड़े रोजगार, कथित तस्करी नेटवर्क, विदेशी फंडिंग और फर्जी दस्तावेजों के संभावित कनेक्शन की जांच कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि जिले में किरायेदारों का सत्यापन अभियान भी लगातार चलाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2009-10 के आसपास अलीगढ़ में मीट एक्सपोर्ट उद्योग के विस्तार के बाद सस्ते श्रमिकों की मांग बढ़ी। इसी दौरान अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या परिवारों के शहर पहुंचने की बात सामने आई। शुरुआती दौर में उन्होंने मकदूम नगर क्षेत्र में किराये पर रहना शुरू किया और बाद में मीट फैक्ट्रियों में ठेकेदारी और मजदूरी से जुड़ गए।

पंजीकृत रोहिंग्या की संख्या में आई कमी
खुफिया तंत्र के मुताबिक कुछ वर्ष पहले तक जिले में 246 पंजीकृत रोहिंग्या थे, जिनके पास शरणार्थी कार्ड मौजूद थे। इनमें से अधिकांश मीट फैक्ट्रियों में कार्यरत थे। समय-समय पर हुई कार्रवाई और गिरफ्तारियों के बाद कई लोग अलीगढ़ छोड़कर चले गए। फिलहाल सरकारी रिकॉर्ड में केवल 8 पंजीकृत रोहिंग्या दर्ज हैं।
विदेशी फंडिंग और घुसपैठ नेटवर्क की जांच
हालिया जांच में प्रवर्तन एजेंसियों के सामने यह बात भी आई है कि विदेशी फंडिंग के जरिए एक सिंडिकेट कथित तौर पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की घुसपैठ कराने में सक्रिय रहा है। जांच के अनुसार इस धनराशि का उपयोग ई-रिक्शा उपलब्ध कराने, छोटे कारोबार शुरू कराने और विभिन्न फैक्ट्रियों में रोजगार दिलाने के लिए किए जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। अलीगढ़, बरेली और सहारनपुर समेत कई जिलों के मीट कारखानों से जुड़े पहलुओं को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
सोने की तस्करी और फर्जी दस्तावेजों के मामले भी जांच के दायरे में
खुफिया एजेंसियों के अनुसार पूर्व में सोने की तस्करी से जुड़े मामलों में भी कुछ लोगों के नाम सामने आए थे। जून 2021 में एटीएस ने दो रोहिंग्या भाइयों को गिरफ्तार किया था। जांच में आरोप था कि दोनों बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के बांग्लादेश के रास्ते भारत पहुंचे थे और बाद में शरणार्थी कार्ड बनवाकर अलीगढ़ में मीट फैक्ट्री से जुड़े कार्य करने लगे। मामले की जांच के दौरान फर्जी दस्तावेजों और अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की गई थी।

बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ भी हुई कार्रवाई
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के आरोप में 10 बांग्लादेशी नागरिक अलीगढ़ जेल में सजा काट रहे हैं। इनमें पिछले वर्ष अगस्त में गांधीपार्क क्षेत्र के कमालपुर गांव स्थित एक ईंट-भट्ठे पर छापेमारी के दौरान पकड़े गए पांच लोग भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार सभी एक ही परिवार के सदस्य थे।
सत्यापन अभियान जारी
पिछले वर्ष खैर क्षेत्र में कुछ युवतियों का वीडियो सामने आया था, जिन पर बाढ़ पीड़ितों के नाम पर सड़क पर चंदा मांगने का आरोप लगा था। उनके पास वैध दस्तावेज नहीं होने की बात भी सामने आई थी। बाद में वे क्षेत्र से गायब हो गई थीं। इस महीने ग्रामीण इलाकों में उनके फिर से देखे जाने की सूचना मिलने के बाद संबंधित पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।
एसपी सिटी आदित्य बंसल ने कहा कि अभी तक किसी जांच एजेंसी ने इस संबंध में उनसे संपर्क नहीं किया है। हालांकि एहतियात के तौर पर शहर के सभी थाना क्षेत्रों में किरायेदारों का सत्यापन कराया जा रहा है और पुलिस पूरी सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
खुफिया एजेंसियों के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में करीब 1200 रोहिंग्या होने का अनुमान है। वहीं देशभर में इनकी संख्या लगभग 40 हजार बताई जाती है, जिनमें करीब 16 हजार के पास शरणार्थी कार्ड हैं। अलीगढ़ में पंजीकृत सभी रोहिंग्या का बायोमीट्रिक रिकॉर्ड उपलब्ध है।
