कैसे पहचानें कि कोई हल्‍के स्‍ट्रेस में है या गहरे डिप्रेशन में, इन संकेतों और लक्षणों से लगाएं पता

नई दिल्ली. आत्महत्या रोकथाम के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रत्येक साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, 2019 में 138,000 से अधिक भारतीयों की आत्महत्या से मृत्यु हुई. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, मानसिक विकारों के आसपास का कलंक लोगों को उपचार उपलब्ध होने पर भी मदद लेने से रोकता है. मानसिक विकार से प्रभावित लगभग दो-तिहाई लोग स्वास्थ्य पेशेवर की मदद नहीं लेते हैं. कलंक ने आत्महत्या के बारे में विभिन्न भ्रांतियों और मिथकों को भी जन्म दिया है जिससे आम लोगों की समझ सीमित हो गई है. कई बार स्ट्रेस और डिप्रेशन में भी फर्क समझ पाना मुश्किल होता है. यहां आपकी मदद के लिए आसान भाषा में बताया गया है.

चिड़चिड़ापन
थकान महसूस करना
निराशा महसूस करना
दोषी या बेकार महसूस करना
अत्यधिक दुखी महसूस करना
ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होना
प्रेरणाहीन महसूस करना
अकेला रहना चाहते हैं
दूसरों के साथ सहानुभूति खोना
धीरे-धीरे चलना या बोलना
मौत या आत्महत्या के बारे में सोच
नींद के पैटर्न में बदलाव
सामान्य से अधिक या कम खाना

चिड़चिड़ापन, क्रोधित
अधिक बोझिल
चिंतित, नर्वस या भयभीत
लगातार विचारों का मन में चलना
अवसादग्रस्त
जीवन में रुचि नहीं
सेंस ऑफ ह्यूमर खोना
भय की भावना
चिंतित या तनावग्रस्त
अकेला

डिप्रेशन एक मानसिक बीमारी है. जबकि स्ट्रेस लगभग सभी को कभी न कभी हो ही जाता है. अगर 2 हफ्तों तक उदासीनता, कुछ पसंद न आना, खुशी न होना, जो चीजें पसंद थी उनमें भी खुशी न मिलना, किसी से उम्मीद न होना, जीवन के बारे में नकारात्मकता, भूख और नींद पर असर होना, ध्यान केंद्रित न कर पाना जैसे लक्षण दिखाई दें तो ये डिप्रेशन के लक्षण हो सकते हैं. स्ट्रेस सबकी जिंदगी में आता और जाता रहता है जैसे एग्जाम का स्ट्रेस, रिलेशनशिप का स्ट्रेस आदि.

 

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