झारखंड से राज्यसभा जा सकते हैं कपिल सिब्बल, कांग्रेस के बजाय झामुमो खेमे ने आगे किया है नाम

रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए आगामी 15 जून को होनेवाले चुनाव की अधिसूचना मंगलवार को जारी कर दी गयी, लेकिन इसे लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष में से किसी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। राज्य में सत्तारूढ़ झामुमो, कांग्रेस और राजद के गठबंधन की ओर से प्रत्याशी के रूप में मशहूर अधिवक्ता और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल का नाम सबसे तेजी से उछला है। इसके अलावा सुबोधकांत सहाय, अविनाश कुमार पांडेय, डॉ अजय कुमारके नाम की भी चर्चा है। 82 सदस्यों वाली झारखंड विधानसभा में संख्याबल का जो गणित है, उसके हिसाब से 48 सदस्यों वाले सत्तारूढ़ गठबंधन के एक प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित मानी जा रही है। चौंकाने वाली बात यह किइस सुनिश्चित सीट पर कपिल सिब्बल का नाम कांग्रेस ने आगे नहीं किया है, बल्कि यह चर्चा झामुमो के खेमे से उठ रही है। झारखंड में माइनिंग लीज के आवंटन से जुड़े मामले में सीएम हेमंत सोरेन की भूमिका की जांच की मांग को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल एक पीआईएल पर चल रही सुनवाई में कपिल सिब्बल बतौर अधिवक्ता उनकी पैरवी कर रहे हैं।

कानूनी उलझनों वाले दो अन्य मामलों में भी सिब्बल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड सरकार के पैरवीकार हैं। सत्ता के अंत:पुर से जो सूचनाएं आ रही हैं, उसके मुताबिक सरकार सिब्बल को उनकी कानूनी सेवाओं के एवज में राज्यसभा में भेजना चाहती है। बता दें कि सत्तारूढ़ गठबंधन में झामुमो के विधायकों की संख्या 30 है, जबकि कांग्रेस के पास 16 और राजद के पास एक विधायक है। दो साल पहले हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस विधायकों ने झामुमो के प्रत्याशी शिबू सोरेन के पक्ष में मतदान किया था, लिहाजा कांग्रेस का दावा है कि इस बार राज्यसभा की सीट पर उसकी दावेदारी बनती है। इसे लेकर झारखंड सरकार में कांग्रेस कोटे के चार मंत्रियों और झारखंड कांग्रेस के प्रभारी अविनाश पांडेय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की थी।

अब इस मसले पर कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी के साथ 25 मई को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुलाकात का कार्यक्रम तय हुआ है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री कांग्रेस को सीट देने पर सहमत हैं, लेकिन इसके लिए वह अपनी ओर से कपिल सिब्बल का नाम कांग्रेस आलाकमान के पास रखेंगे। दूसरी तरफ कांग्रेस की झारखंड प्रदेश इकाई और तमाम स्थानीय नेता कपिल सिब्बल के नाम पर शायद ही सहमत हों। कांग्रेस आलाकमान के दरबार में झारखंड के जिन नेताओं की दावेदारी प्रमुखता से पहुंची है, उनमें पूर्व केंद्रीय सुबोधकांत सहाय, पूर्व सांसद फुरकान अंसारी, झारखंड प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडेय, पूर्व सांसद डॉ अजय कुमार और प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर के नाम प्रमुख हैं। कांग्रेस की परंपरा के मुताबिक उम्मीदवार के नाम पर आखिरी मुहर पार्टी आलाकमान की ओर से लगेगी। फिलहाल आधिकारिक तौर पर कांग्रेस या झामुमो की ओर से कोई वक्तव्य नहीं आया है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि अगले एक हफ्ते के अंदर उम्मीदवारी की तस्वीर साफ हो सकती है।

झारखंड से राज्यसभा की दूसरी सीट पर प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा की दावेदारी मजबूत है, लेकिन अगर इस सीट के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन नेभी प्रत्याशी उतार दिया तो बीजेपी का प्रत्याशी कठिन संघर्ष में उलझ सकता है। इस सीट के लिए भाजपा की ओर से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का नाम सबसे आगे चल रहा है। इसके अलावा मुख्तार अब्बास नकवी, महेश पोद्दार, प्रदेश महामंत्री प्रदीप वर्मा, आदित्य साहू, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिनेशानंद गोस्वामी, प्रदेश कोषाध्यक्ष दीपक बंका के नाम भी चर्चा में हैं।

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