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‘एक बूंद तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे’, अमेरिका के ‘इकोनॉमिक डी-डे’ पर ईरान का पलटवार, होर्मुज पर बढ़ा तनाव

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब सैन्य टकराव से आगे बढ़कर आर्थिक मोर्चे तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई की घोषणा के बाद तेहरान ने भी कड़ा जवाब दिया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका का कथित आर्थिक युद्ध जारी रहा तो फारस की खाड़ी से कच्चे तेल की एक बूंद भी बाहर नहीं जाने दी जाएगी।

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रजाई ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि आर्थिक युद्ध जारी रहा तो केवल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ही नहीं, बल्कि फारस की खाड़ी के किसी भी हिस्से से तेल का निर्यात नहीं होने दिया जाएगा।

अमेरिका ने अभियान को बताया ‘इकोनॉमिक डी-डे’

इससे पहले अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ बड़े आर्थिक अभियान की घोषणा की थी। उन्होंने इसे ‘इकोनॉमिक डी-डे’ बताते हुए कहा कि अमेरिका अब ईरानी अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाली वित्तीय कड़ियों को निशाना बनाएगा।

बेसेंट के मुताबिक, अमेरिका अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहा है और उसका उद्देश्य ईरानी शासन की आर्थिक जीवनरेखाओं को कमजोर करना है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस कार्रवाई को लेकर सख्त रुख अपनाया है।

ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान के साथ कारोबार करने या उसे किसी भी तरह की मदद पहुंचाने वाले देशों और कंपनियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

ईरान ने अमेरिका के साथ समर्थक देशों को भी चेताया

मोहसिन रजाई ने अमेरिका के अलावा उन देशों को भी चेतावनी दी है, जो ईरान के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक अभियान में शामिल होंगे या उसका समर्थन करेंगे।

उन्होंने संकेत दिया कि ईरान ऐसे किसी भी कदम को अपने खिलाफ ‘युद्ध की कार्रवाई’ के तौर पर देख सकता है। इस बयान के बाद क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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होर्मुज पर टिकी दुनिया की नजर

ईरान की इस चेतावनी का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही होती है।

ईरान लंबे समय से अमेरिका पर नाकाबंदी और आर्थिक दबाव डालने का आरोप लगाता रहा है। उसका कहना है कि जब तक अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत, कथित नाकाबंदी में बदलाव और जब्त ईरानी संपत्तियों से जुड़े मामलों का समाधान नहीं होता, तब तक होर्मुज में सामान्य स्थिति बहाल करना आसान नहीं होगा।

तेल आपूर्ति बाधित हुई तो दुनिया पर पड़ेगा असर

अगर फारस की खाड़ी से तेल का निर्यात बाधित होता है तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

इसी वजह से अमेरिका के ‘इकोनॉमिक डी-डे’ के ऐलान के बाद ईरान की ओर से आई यह चेतावनी बेहद अहम मानी जा रही है। फिलहाल दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज है और होर्मुज को लेकर तनाव सैन्य क्षेत्र से आगे बढ़कर आर्थिक मोर्चे पर भी फैलता दिखाई दे रहा है।

 

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