जंतर-मंतर प्रदर्शन में महिला की तस्वीर से छेड़छाड़ का आरोप, AI से फर्जी फोटो बनाकर पोस्टर-बैनर लगाने पर एफआईआर
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान एक महिला की निजी तस्वीर के कथित गलत इस्तेमाल का मामला सामने आया है। महिला की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने साइबर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उसकी तस्वीर को एआई और फेस-स्वैप तकनीक के जरिए बदलकर आपत्तिजनक और फर्जी तस्वीर तैयार की गई और फिर प्रदर्शन के दौरान उसका इस्तेमाल पोस्टर और बैनर में किया गया।
महिला ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि उसका संबंधित संगठन या जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है। उसका आरोप है कि उसकी निजी तस्वीर बिना सहमति के इस्तेमाल की गई और उसमें इस तरह बदलाव किया गया, जिससे उसकी सामाजिक छवि और प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती थी।

बड़े पोस्टर-बैनर लगाने और वीडियो बनाने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कथित फर्जी तस्वीर वाले बड़े-बड़े बैनर और पोस्टर लगाए और लहराए गए। महिला ने आरोप लगाया कि उसके खिलाफ आपत्तिजनक और अमर्यादित नारे भी लगाए गए। इसके अलावा प्रदर्शन से जुड़े वीडियो बनाए गए और उन्हें सोशल मीडिया मंचों पर प्रसारित किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।
महिला का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से उसकी गरिमा को ठेस पहुंची। उसने आरोप लगाया कि निजी तस्वीर को बिना अनुमति सार्वजनिक प्रदर्शन में इस्तेमाल करना और उसके आधार पर आपत्तिजनक सामग्री तैयार करना उसकी छवि को नुकसान पहुंचाने वाला था।
चार लोगों के नाम शिकायत में, लेकिन आरोपी नहीं बनाए गए
एफआईआर में अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह के नाम का उल्लेख किया गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन चारों को एफआईआर में आरोपी के तौर पर दर्ज नहीं किया गया है। शिकायत में किसी व्यक्ति का नाम आना और उसका आरोपी के रूप में दर्ज होना अलग-अलग कानूनी स्थिति है।
धमकी और छेड़छाड़ के भी आरोप
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महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान उसे धमकाया गया और उसके साथ छेड़छाड़ की गई। शिकायत के अनुसार, कथित आपत्तिजनक सामग्री को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के साथ-साथ घटना से जुड़े वीडियो भी बनाए गए और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा किया गया।
पुलिस के सामने अब तस्वीर तैयार किए जाने, उसमें बदलाव करने, पोस्टर और बैनर में उसके इस्तेमाल, प्रदर्शन के दौरान सामग्री प्रदर्शित करने और वीडियो प्रसारित किए जाने से जुड़े आरोप जांच के दायरे में हैं।
प्रदर्शन से संबंध नहीं होने का महिला का दावा
महिला ने दोहराया है कि उसका प्रदर्शन या संबंधित संगठन से कोई संबंध नहीं था और उसने अपनी तस्वीर के इस्तेमाल की अनुमति भी नहीं दी थी। इसी आधार पर उसने पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में कथित धमकी, छेड़छाड़, अमर्यादित नारे और सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित किए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
फिलहाल मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई है। शिकायत में नाम सामने आए चारों लोगों को आरोपी नहीं बनाया गया है। आगे की कार्रवाई शिकायत में लगाए गए आरोपों और कथित डिजिटल सामग्री के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों की जांच के आधार पर होगी।

