Saturday, September 5, 2026
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शिक्षक दिवस पर बीबीएयू में ज्ञान, संस्कार और समानता पर मंथन, वक्ताओं ने कहा- विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षक की भूमिका सबसे अहम

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर स्थायी आयोजन समिति की ओर से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों में संस्कार, संवेदनशीलता, आत्मविश्वास, समानता और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मुख्य अतिथि प्रसिद्ध भारतीय लेखिका एवं पद्मश्री विद्या बिंदु सिंह तथा विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध आयुर्वेदिक सर्जन एवं पद्मश्री डॉ. केवल कृष्ण ठकराल रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई। इसके बाद आयोजन समिति की ओर से अतिथियों और शिक्षकों का स्वागत किया गया। डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू ने उपस्थित अतिथियों एवं शिक्षकों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य और रूपरेखा की जानकारी दी। मंच संचालन प्रो. सूफिया अहमद ने किया।

शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं : कुलपति

कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने शिक्षक दिवस पर महान शिक्षाविद्, दार्शनिक एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते हुए कहा कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्वपूर्ण संवाहक थे। उनका जीवन शिक्षा, दर्शन और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित रहा और उनके जीवन के विभिन्न पहलू आज भी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षक की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने या विषय का ज्ञान देने तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों के साथ निरंतर संवाद, उनकी क्षमताओं की पहचान और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना भी शिक्षक के दायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शिक्षक विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और समाज एवं राष्ट्र के लिए बेहतर करने की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रो. मित्तल ने कहा कि शिक्षा मूल रूप से दोतरफा संवाद की प्रक्रिया है। इसे कक्षा और पुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक जीवन से जोड़ना जरूरी है। किसी भी शिक्षण संस्थान का लक्ष्य केवल विद्यार्थियों को डिग्री देना नहीं, बल्कि उनके समग्र और सशक्त व्यक्तित्व का निर्माण होना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों में प्रश्न करने, सोचने, सीखने और नवाचार की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने का आह्वान किया, ताकि वे अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के विकास में कर सकें।

उन्होंने कहा कि शिक्षक का विद्यार्थियों के जीवन में किया गया सकारात्मक हस्तक्षेप लंबे समय तक उसके व्यक्तित्व और भविष्य को प्रभावित करता है और यही शिक्षक की वास्तविक उपलब्धि है।

गुरु के योगदान को शब्दों में बांधना संभव नहीं : विद्या बिंदु सिंह

मुख्य अतिथि पद्मश्री विद्या बिंदु सिंह ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन को आदर्श शिक्षक की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन ने अपना जीवन ज्ञान, शिक्षा और भारतीय दर्शन के प्रसार के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि जब ज्ञान बांटने वाला व्यक्ति देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति के पद तक पहुंचता है, तो यह शिक्षा और शिक्षक की गरिमा को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल विषय का ज्ञान नहीं देता, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, विचार और जीवन को सही दिशा भी प्रदान करता है। शिक्षक के मार्गदर्शन से विद्यार्थी अपनी क्षमताओं को पहचानकर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देने के योग्य बनते हैं।

विद्या बिंदु सिंह ने संत कबीर के दोहे का स्मरण करते हुए गुरु के योगदान की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि गुरु के योगदान और उपकारों का पूरा वर्णन शब्दों में संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में पहली गुरु मां होती हैं, जो संस्कार और जीवन के मूलभूत मूल्य सिखाती हैं, जबकि पिता भी महत्वपूर्ण शिक्षक के रूप में जीवन का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके दिए ज्ञान, संस्कार और जीवन-मूल्यों को अपने आचरण में उतारना ही शिक्षक के प्रति सच्चा सम्मान है।

शिक्षा और सामाजिक न्याय से मजबूत होगा समाज : डॉ. ठकराल

विशिष्ट अतिथि पद्मश्री डॉ. केवल कृष्ण ठकराल ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन भारतीय संस्कृति, दर्शन और शिक्षा के मूल्यों के प्रति समर्पित था। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है।

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बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर का उल्लेख करते हुए डॉ. ठकराल ने कहा कि यह गर्व की बात है कि शिक्षक दिवस का कार्यक्रम ऐसे विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित हो रहा है, जो बाबा साहब के नाम से जुड़ा है और उनके विचारों एवं आदर्शों को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब ने समाज को समता, शिक्षा और सामाजिक न्याय का मार्ग दिखाया।

उन्होंने कहा कि यदि हम बाबासाहेब के विचारों को जीवन में अपनाकर एक-दूसरे के सम्मान, समानता और सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ें तो देश निरंतर प्रगति और विकास की दिशा में आगे बढ़ता रहेगा। शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों में ज्ञान और कौशल के साथ मानवीय मूल्य, संवेदनशीलता, अनुशासन और परस्पर सम्मान की भावना भी विकसित करें। यही मूल्य सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र की नींव तैयार करते हैं।

प्रतिभाओं को पहचानकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें शिक्षक

डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू ने कहा कि शिक्षक का काम केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देना नहीं है। शिक्षक को विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा और संभावनाओं को पहचानकर उन्हें सही अवसर तलाशने तथा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कक्षा में शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनके ज्ञान, कौशल, आत्मविश्वास और सोच को सही दिशा देने के साथ-साथ सशक्त एवं जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण में भी शिक्षक का योगदान अहम है। उन्होंने कहा कि यही भूमिका आगे चलकर राष्ट्र निर्माण को मजबूत करती है।

सेवानिवृत्त शिक्षकों और उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान

शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान, उत्कृष्ट कार्य और समर्पित सेवाओं के लिए विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षकों, विश्वविद्यालय के सलाहकारों, विश्व के सर्वश्रेष्ठ 2 प्रतिशत शिक्षकों तथा अन्य शिक्षकों को पुरस्कार और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।

इस दौरान शिक्षकों ने अपने शिक्षण अनुभव, कार्यक्षेत्र से जुड़े अनुभव और विद्यार्थियों के साथ अपने जुड़ाव से जुड़े संस्मरण साझा किए। उन्होंने शिक्षा के बदलते स्वरूप, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और शिक्षक-विद्यार्थी संबंधों के महत्व पर भी अपने विचार रखे।

‘बोटेनिकल माइक्रोबायोम्स’ पुस्तक का विमोचन

कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के डॉ. एस. जयशंकर तथा अन्य संस्थान के डॉ. अश्विनी कुमार और डॉ. शोभित राज द्वारा संयुक्त रूप से लिखित पुस्तक ‘बोटेनिकल माइक्रोबायोम्स – सस्टेनेबल प्रैक्टिसेस इन एग्रीकल्चर एंड इकोसिस्टम मैनेजमेंट’ का विमोचन भी किया गया।

अंत में स्थायी आयोजन समिति की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर आभार व्यक्त किया गया। प्रो. के.एल. महावर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी मौजूद रहे।

 

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