हैलोवीन पर फ्रांस में हिंसा का खतरा, 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात; जर्मनी के 21 शहरों में सड़कों पर उतरेंगे युवा
पेरिस। यूरोप के दो प्रमुख देशों फ्रांस और जर्मनी में शनिवार को बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों की तैयारी है। फ्रांस में हैलोवीन के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ की आशंका को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। देशभर में करीब 70 हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। आशंका है कि उपद्रवी हैलोवीन के मुखौटों और विशेष वेशभूषा का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपा सकते हैं। दूसरी ओर, जर्मनी में नई पीढ़ी के युवा महंगाई, शिक्षा व्यवस्था, सरकारी खर्चों में कटौती और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों को लेकर 21 शहरों में प्रदर्शन करेंगे।फ्रांस में हिंसा की आशंका, दुकानदारों ने बंद की सुरक्षा व्यवस्था
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने मौजूदा हालात को देखते हुए हिंसा की आशंका काफी अधिक जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पिछले सप्ताह 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई थीं। ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं।
हिंसा की आशंका का असर कारोबारियों पर भी दिखाई दे रहा है। कई दुकानदारों ने अपनी संपत्तियों को नुकसान से बचाने के लिए दुकानों के सामने लकड़ी के पटरे लगा दिए हैं। फ्रांस के चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष एलेन डि क्रेसेंजो के मुताबिक, व्यापारी फिलहाल शनिवार का दिन शांति से गुजरने का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें चिंता है कि हैलोवीन के दौरान मुखौटे पहनकर आने वाले उपद्रवियों की पहचान करना मुश्किल हो सकता है।
जर्मनी के 21 शहरों में Gen Z का आंदोलन
फ्रांस के साथ-साथ जर्मनी में भी युवाओं के बड़े प्रदर्शन की तैयारी है। ‘Gen Z regelt’ यानी ‘जेनरेशन जेड खुद संभालेगी’ नाम से शुरू किए गए आंदोलन के तहत 21 शहरों में विरोध प्रदर्शन बुलाए गए हैं। इनमें बर्लिन, कोलोन, हैम्बर्ग और म्यूनिख जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं।
इस आंदोलन में शामिल युवा स्कूलों की बदहाल स्थिति, बढ़ती महंगाई, सरकारी खर्चों में कटौती, सामाजिक असमानता, अनिवार्य सैन्य सेवा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों को उठा रहे हैं। आंदोलन के आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाना है और वे किसी भी तरह की हिंसा के पक्ष में नहीं हैं।
हालांकि, पुलिस को आशंका है कि कुछ कट्टरपंथी संगठन प्रदर्शनों के बीच घुसकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। जर्मन संघीय पुलिस के संगठन जीडीपी के प्रमुख एंड्रियास रॉसकोफ ने चेतावनी दी है कि हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आखिर क्यों सरकारों से नाराज हैं यूरोप के युवा?
यूरोप में युवाओं के बीच बढ़ती नाराजगी के पीछे आर्थिक और सामाजिक मुद्दे बड़ी वजह बनकर सामने आए हैं। फ्रांस में सितंबर के आखिर से विरोध प्रदर्शनों ने जोर पकड़ना शुरू किया। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की अल्पमत सरकार इस समय वर्ष 2027 के बजट पर चर्चा कर रही है। देश पर बढ़ते कर्ज और उधारी की लागत के कारण सरकार पर सरकारी खर्च कम करने का दबाव है।
इस बीच शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी असंतोष बढ़ रहा है। स्कूलों की खराब स्थिति, कक्षाओं में विद्यार्थियों की अधिक संख्या और शिक्षा में कथित भेदभाव के खिलाफ छात्र भी आंदोलन का हिस्सा बन रहे हैं। ट्रेड यूनियन और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोग भी महंगाई तथा रोजमर्रा की जरूरतों पर बढ़ते खर्च को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
जर्मनी में भी नई पीढ़ी की नाराजगी के पीछे महंगाई, स्कूलों की खराब स्थिति, सरकारी खर्च में कटौती और नीतिगत फैसलों में युवाओं की अनदेखी जैसे मुद्दे हैं। दोनों देशों में हो रहे ये घटनाक्रम संकेत दे रहे हैं कि यूरोप में युवा वर्ग का असंतोष लगातार बढ़ रहा है और यह सरकारों के सामने एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
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