यूपी में ग्राम प्रधानों को बड़ी राहत, 6 महीने बढ़ा कार्यकाल; अब प्रशासक के रूप में संभालेंगे पंचायतों की जिम्मेदारी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव में संभावित देरी को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के बाद प्रदेश के मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। पंचायती राज विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार अब प्रदेश की 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में निवर्तमान प्रधान ही प्रशासक के तौर पर कामकाज संभालेंगे।

प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा था। ऐसे में सरकार ने गांवों में विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया है। आदेश जारी होने के बाद बुधवार से सभी ग्राम पंचायतों में वर्तमान प्रधान प्रशासक की भूमिका में कार्य करेंगे।
गांवों में नहीं रुकेंगे विकास कार्य
सरकार का कहना है कि पंचायत चुनाव में आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने में अभी समय लगेगा। ऐसे में यदि तत्काल नई पंचायतों का गठन नहीं हो पाता, तो विकास कार्य प्रभावित हो सकते थे। इसी को देखते हुए मौजूदा प्रधानों को ही जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया गया है।
इस फैसले के बाद गांवों में सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, मनरेगा, सड़क मरम्मत और अन्य जरूरी विकास कार्य लगातार जारी रहेंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रशासक के रूप में कार्यरत प्रधान केवल नियमित और सामान्य कार्य ही कर सकेंगे।
डीएम की अनुमति के बिना नहीं होंगे बड़े फैसले
जारी आदेश के मुताबिक ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जिलाधिकारी उन्हें औपचारिक रूप से प्रशासक नामित करेंगे। हालांकि किसी भी बड़े वित्तीय या नीतिगत निर्णय के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

अब तक परंपरा यह रही थी कि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने पर एडीओ पंचायत को प्रशासक नियुक्त किया जाता था। लेकिन इस बार सरकार ने ग्राम प्रधान संघ की मांग और गांवों में प्रशासनिक निरंतरता को ध्यान में रखते हुए निवर्तमान प्रधानों को ही जिम्मेदारी देने का फैसला लिया है।
जुलाई में क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों का भी खत्म होगा कार्यकाल
प्रदेश में क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल 19 जुलाई और जिला पंचायतों का कार्यकाल 11 जुलाई को समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि इन संस्थाओं में भी प्रशासक नियुक्त किए जा सकते हैं।
आरक्षण प्रक्रिया के चलते टल सकते हैं पंचायत चुनाव
राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। आयोग जिलों में जाकर आबादी के आंकड़े जुटाएगा और उसी आधार पर आरक्षण तय किया जाएगा। इसी प्रक्रिया में समय लगने के कारण पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।
नियमों के अनुसार किसी ब्लॉक में पिछड़ा वर्ग की आबादी 27 प्रतिशत से अधिक होने पर भी आरक्षण की सीमा 27 प्रतिशत ही रहेगी। वहीं जहां आबादी कम होगी, वहां उसी अनुपात में सीटें आरक्षित की जाएंगी।
