पाकिस्तान जाने वाले पानी के बेहतर उपयोग की तैयारी, भारत की दो बड़ी सुरंग परियोजनाओं पर 2600 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव
नई दिल्ली: सिंधु बेसिन की नदियों से मिलने वाले अपने हिस्से के जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए भारत ने दो महत्वपूर्ण सुरंग परियोजनाओं की तैयारी शुरू कर दी है। इन परियोजनाओं पर कुल करीब 2600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सरकार का लक्ष्य जल भंडारण क्षमता बढ़ाने, जल प्रवाह प्रबंधन को मजबूत करने और उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।
सिंधु जल संधि के तहत सिंधु, चिनाब और झेलम नदियों के अधिकांश जल उपयोग का अधिकार पाकिस्तान के पास है, जबकि रावी, ब्यास और सतलुज नदियों के जल का उपयोग भारत करता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत अपने हिस्से के जल संसाधनों के बेहतर दोहन और जल अवसंरचना के विस्तार पर लगातार जोर दे रहा है।

जल प्रबंधन क्षमता बढ़ाने पर सरकार का फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी नदी के जल प्रवाह को पूरी तरह रोकना व्यावहारिक रूप से आसान नहीं होता, लेकिन आधुनिक अवसंरचना और जल प्रबंधन प्रणालियों के जरिए उपलब्ध जल का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इसी सोच के तहत दो बड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है, जिनका उद्देश्य दीर्घकालिक जल सुरक्षा को मजबूत करना है।
चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना पर 2352 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान
प्रस्तावित चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना को इस योजना का सबसे बड़ा हिस्सा माना जा रहा है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2352 करोड़ रुपये आंकी गई है। योजना के तहत लगभग 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया जाएगा।
परियोजना के पहले चरण में लाहौल घाटी में नदी पर 19 मीटर ऊंचे बैराज का निर्माण प्रस्तावित है। इसके बाद विशेष हाइड्रोलिक संरचनाओं और सुरंग प्रणाली के माध्यम से चंद्रा नदी के जल को ब्यास बेसिन की ओर मोड़ने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रबंधन में मदद मिलने की उम्मीद है।
सलाल परियोजना में गाद निकासी के लिए बनेगी नई सुरंग

दूसरी महत्वपूर्ण परियोजना सलाल जलविद्युत परियोजना से जुड़ी हुई है। इस पर करीब 268 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। योजना के तहत एक नई डायवर्जन-कम-सेडिमेंट बाईपास सुरंग का निर्माण किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाली मिट्टी और तलछट के कारण परियोजना में बड़ी मात्रा में गाद जमा हो गई है, जिससे जलाशय की भंडारण क्षमता प्रभावित हुई है। नई सुरंग बनने के बाद गाद निकासी की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी और जलाशय की उपयोगिता बढ़ेगी।
दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा हैं दोनों परियोजनाएं
विशेषज्ञों के मुताबिक ये दोनों परियोजनाएं केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही हैं। इनके पूरा होने के बाद जल भंडारण क्षमता में सुधार, प्रवाह नियंत्रण में मजबूती और उपलब्ध जल संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग की संभावना बढ़ेगी।
हालांकि, इस तरह की बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं को पूरा होने में कई वर्ष लग सकते हैं, लेकिन इन्हें सिंधु बेसिन क्षेत्र में जल प्रबंधन क्षमता को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
