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जलवायु परिवर्तन पर बीबीएयू में मंथन, कृषि और खाद्य सुरक्षा पर मंडराते खतरे को लेकर विशेषज्ञों ने जताई चिंता

लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में बुधवार को ‘कृषि पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उद्यान विभाग, बीबीएयू और युवराष्ट्र, अवध प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि, पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने बदलती जलवायु के कारण कृषि क्षेत्र के सामने खड़ी चुनौतियों और संभावित समाधानों पर विचार साझा किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अवध प्रांत के सह प्रांत प्रचारक संजय जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मंच पर डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विद्यापीठ की संकायाध्यक्ष प्रो. दीपा एच. द्विवेदी, उद्यान विभागाध्यक्ष प्रो. एम.एल. मीणा और कार्यक्रम संयोजक डॉ. रविशंकर वर्मा भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत बाबासाहेब के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद विश्वविद्यालय कुलगीत का गायन हुआ और आयोजन समिति की ओर से अतिथियों एवं शिक्षकों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।

कृषि उत्पादन और किसानों की आजीविका पर पड़ रहा असर : कुलपति

अपने संबोधन में कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य का कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और किसानों की आजीविका पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलित संबंध स्थापित करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाना समय की मांग है।

उन्होंने जल, भूमि, वन और जैव विविधता जैसे प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण एवं सतत उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि वृक्षारोपण, संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाकर ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

अनियमित बारिश और बढ़ते तापमान से बढ़ रही चुनौतियां

मुख्य अतिथि संजय जी ने जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि क्षेत्र में उत्पन्न हो रही चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम चक्र, अनियमित वर्षा और लगातार बढ़ते तापमान का सीधा असर कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर पड़ रहा है। उन्होंने कृषि क्षेत्र को इन चुनौतियों के प्रति सजग रहने और दीर्घकालिक रणनीतियां अपनाने की आवश्यकता बताई।

विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

संगोष्ठी के दौरान प्रो. एस. विक्टर बाबू, प्रो. दीपा एच. द्विवेदी, प्रो. एम.एल. मीणा और डॉ. रविशंकर वर्मा ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने जलवायु परिवर्तन के विभिन्न आयामों, कृषि उत्पादन पर उसके प्रभाव, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और खाद्य सुरक्षा के सामने उभरती चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, गैर-शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी तथा किसान उपस्थित रहे।

 

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