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इंश्योरेंस कंपनी को झटका! हादसे के पुख्ता सबूत नहीं थे, फिर भी कार मालिक को मिला 1.25 लाख रुपये का क्लेम

सूरत: गुजरात के सूरत से एक दिलचस्प उपभोक्ता विवाद मामला सामने आया है, जहां दुर्घटना की परिस्थितियां पूरी तरह साबित नहीं होने के बावजूद एक कार मालिक को बीमा क्लेम का लाभ मिला। नवसारी उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अपने फैसले में कहा कि भले ही दुर्घटना को लेकर कई सवाल मौजूद हों, लेकिन वाहन को नुकसान पहुंचने का तथ्य निर्विवाद है। ऐसे में बीमा कंपनी द्वारा दावा पूरी तरह खारिज करना उचित नहीं माना जा सकता।

आयोग ने बीमा कंपनी को सर्वेयर द्वारा आंकी गई 1.25 लाख रुपये की राशि का भुगतान करने के साथ-साथ मानसिक और शारीरिक परेशानी के लिए अतिरिक्त 15 हजार रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।

क्या था पूरा मामला?

नवसारी निवासी 43 वर्षीय चिराग देसाई ने 18 अक्टूबर 2022 को अपनी कार के लिए एक व्यापक बीमा पॉलिसी खरीदी थी। इस एक वर्ष की पॉलिसी के लिए उन्होंने 6,853 रुपये का प्रीमियम जमा किया था। पॉलिसी के तहत वाहन की इंश्योर्ड डिक्लेयर वैल्यू (आईडीवी) 3.10 लाख रुपये निर्धारित की गई थी, जिसमें वाहन क्षति और थर्ड पार्टी जोखिम दोनों शामिल थे।

चिराग देसाई का दावा था कि 20 जून 2023 को उनकी कार एक दुर्घटना में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद उन्होंने बीमा कंपनी से 3.10 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी।

बीमा कंपनी ने क्यों खारिज कर दिया था दावा?

दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद बीमा कंपनी ने नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वेयर नियुक्त किया। जांच के बाद 27 जुलाई 2023 को कंपनी ने दावा खारिज कर दिया।

कंपनी का कहना था कि दुर्घटना की परिस्थितियां संदिग्ध हैं और शिकायतकर्ता ने कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध नहीं कराईं। बीमा कंपनी ने यह भी सवाल उठाया कि कथित रूप से इतनी गंभीर दुर्घटना होने के बावजूद न तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और न ही कोई एफआईआर कराई गई।

जांच रिपोर्ट में उठे कई सवाल

मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र जांचकर्ता भी नियुक्त किया गया था। उसकी रिपोर्ट में दुर्घटना को लेकर कई विसंगतियों का उल्लेख किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, वाहन के डैशबोर्ड पर हुआ नुकसान कथित ट्रक टक्कर की कहानी से मेल नहीं खाता था। जांच में यह भी पाया गया कि दुर्घटना में वाहन को भारी नुकसान होने का दावा किया गया, लेकिन चालक को केवल मामूली चोटें आईं और उसने कोई चिकित्सीय उपचार भी नहीं कराया।

इसके अलावा घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिला और दुर्घटना के चार दिन बाद वाहन को मरम्मत के लिए गैरेज भेजा गया। इन सभी तथ्यों ने दुर्घटना की वास्तविक परिस्थितियों पर सवाल खड़े किए।

आयोग ने दोनों पक्षों के तर्कों पर किया विचार

सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता कथित ट्रक का रजिस्ट्रेशन नंबर, चालक की पहचान और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां प्रस्तुत नहीं कर सका। आयोग ने यह भी स्वीकार किया कि दुर्घटना के बाद वाहन को मरम्मत के लिए भेजने में हुई देरी और प्रत्यक्षदर्शियों का अभाव संदेह पैदा करता है।

हालांकि आयोग ने यह भी कहा कि वाहन को नुकसान पहुंचा था, इस तथ्य से बीमा कंपनी भी इनकार नहीं कर रही थी। कंपनी के अपने सर्वेयर ने नुकसान का मूल्यांकन 1.25 लाख रुपये किया था।

सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी के वकील ने भी सर्वेयर द्वारा निर्धारित राशि के भुगतान की इच्छा जताई थी।

दावा खारिज करना ‘सेवा में कमी’ माना गया

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि जब वाहन को हुए नुकसान को स्वीकार किया जा चुका है, तब केवल दुर्घटना की परिस्थितियों को आधार बनाकर पूरे दावे को अस्वीकार करना उचित नहीं है।

आयोग ने इसे बीमा कंपनी की ओर से ‘सेवा में कमी’ माना और शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 1.25 लाख रुपये का क्लेम भुगतान करने का आदेश दिया। साथ ही मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए 15 हजार रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने को भी कहा।

उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण संदेश

यह फैसला बताता है कि यदि बीमा कंपनी स्वयं वाहन को नुकसान पहुंचने की पुष्टि कर चुकी है, तो केवल प्रक्रियागत या परिस्थितिजन्य संदेह के आधार पर पूरे दावे को खारिज करना हमेशा न्यायसंगत नहीं माना जाएगा। उपभोक्ता आयोग ने नुकसान के वास्तविक आकलन को प्राथमिकता देते हुए शिकायतकर्ता को राहत प्रदान की।

 

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