Friday, July 17, 2026
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दरबार आलिया मीनाइया में दो दिवसीय जश्न-ए-फ़ैज़ान-ए-मुर्शिद सम्पन्न, देशभर के प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

गोंडा, 17 जुलाई। पूर्वी भारत की मशहूर खानकाह दरबार आलिया मीनाइया एवं जामिया अमीरुल उलूम मीनाइया में 16 एवं 17 जुलाई को जानशीन-ए-महबूबुल उलेमा वल मशाइख हज़रत जमाल मीना शाह की सरपरस्ती में दो दिवसीय जश्न-ए-फ़ैज़ान-ए-मुर्शिद तथा ऑल इंडिया हुस्न-ए-क़िराअत, हुस्न-ए-अज़ान एवं मुसाबक़ा-ए-ख़िताब का भव्य आयोजन सज्जादानशीन हज़रत शाह जमाल मीना साहब की सरपरस्ती में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए उलेमा, क़ुर्रा, तलबा एवं बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने सहभागिता की।

पहले दिन ज़ुहर की नमाज़ के बाद पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, हज़रत अली, हज़रत इमाम हसन, हज़रत इमाम हुसैन तथा हुज़ूर ग़ौस-ए-पाक अलैहिर्रह्मा के मोए मुबारक की ज़ियारत कराई गई। इस दौरान हज़ारों अकीदतमंदों ने ज़ियारत का सौभाग्य प्राप्त किया।

रात्रि में आयोजित ऑल इंडिया हुस्न-ए-क़िराअत, हुस्न-ए-अज़ान एवं मुसाबक़ा-ए-ख़िताब में देश के विभिन्न शहरों से आए प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं का निर्णय प्रसिद्ध उलेमा एवं क़ुरआन विशेषज्ञों ने किया।

दूसरे दिन क़ुल शरीफ़ की महफ़िल आयोजित हुई, जिसमें नअत, मनक़बत एवं धार्मिक तक़रीरें पेश की गईं। इसके बाद जश्न-ए-फ़ैज़ान-ए-मुर्शिद के मुख्य वक्ता हज़रत अल्लामा मुफ़्ती मुहम्मद अख़्तर हुसैन अलीमी ने अपने संबोधन में कहा कि ज्ञान के साथ सहनशीलता आती है और सफलता प्राप्त करने के लिए किसी सफल व्यक्ति को अपना आदर्श बनाना चाहिए।

ख़तीब-ए-हिंदुस्तान मौलाना मुहम्मद मुज़क्किर ख़ान एवं मुफ़्ती मुहम्मद नईम अमजदी अज़हरी ने हज़रत महबूबुल उलेमा वल मशाइख अलैहिर्रह्मह की शिक्षाओं एवं मुर्शिद की अहमियत पर विस्तार से प्रकाश डाला।

समारोह के दौरान ऑल इंडिया क़िराअत, अज़ान, मुसाबक़ा-ए-ख़िताब तथा इस्लामिक क्विज़ प्रतियोगिता के विजेताओं को नक़द पुरस्कार, ट्रॉफी एवं उपहार देकर सम्मानित किया गया। क़िराअत एवं ख़िताब प्रतियोगिता के प्रथम विजेताओं को 51-51 हज़ार रुपये तथा अज़ान प्रतियोगिता के प्रथम विजेता को 25 हज़ार रुपये का नक़द पुरस्कार प्रदान किया गया। सभी प्रतिभागियों को भी स्मृति-उपहार एवं ज़ाद-ए-राह भेंट किया गया।

कार्यक्रम का संचालन जनाब क़िस्मत सिकंदरपुरी ने किया। आज़म मीनाई, शकील मीनाई एवं अन्य मद्दाहों ने नअत व मनक़बत प्रस्तुत की। अंत में ख़ानकाह, इदारे, देश की तरक़्क़ी, अमन-चैन एवं पूरी उम्मत की खुशहाली के लिए सामूहिक दुआ की गई।

इस अवसर पर ताजुल क़ुर्रा हज़रत अल्लामा क़ारी निसार अहमद मीनाई मिस्बाही, हज़रत अल्लामा सूफ़ी अब्दुल वहीद साहब, हज़रत मौलाना सैयद ज़फ़ीर साहब, डॉ. लायक़ अली ख़ान, क़ारी इलियास मशाहदी, मौलाना मुक़ीम मशाहदी, फ़क़ीर मुहम्मद मीनाई, एहसान मीनाई, तबरेज़ आलम, क़ारी रफ़ीक़ मीनाई, क़ारी अरशद सहित अनेक उलेमा, असातिज़ा, अइम्मा-ए-मसाजिद एवं सैकड़ों अकीदतमंद उपस्थित रहे।

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