‘रेजिग्नेशन पार्टी’ को लेकर CJP पर नए सवाल, छात्रों को बेसहारा छोड़ने के आरोपों पर प्रवक्ता ने दी सफाई
नई दिल्ली: नीट पेपर लीक मामले को लेकर चले लंबे आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। हालांकि आंदोलन समाप्त होने के बाद पार्टी नेतृत्व पर नए आरोप लगने शुरू हो गए हैं। राजनीतिक विश्लेषक और यूट्यूबर मेघनाद एस ने दावा किया है कि आंदोलन खत्म होने के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों और स्वयंसेवकों को बिना पर्याप्त सहयोग के छोड़ दिया गया, जबकि पार्टी नेतृत्व जश्न मनाने में व्यस्त था।
वायरल वीडियो के बाद शुरू हुआ विवाद

पूरा विवाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद सामने आया। वीडियो में सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास समर्थकों और बच्चों के साथ एक हॉल में नृत्य करते दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को ‘रेजिग्नेशन पार्टी’ बताकर साझा किया गया, जिसके बाद इसे लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
मेघनाद एस ने लगाए गंभीर आरोप
मेघनाद एस ने सोशल मीडिया पर किए गए अपने पोस्ट में दावा किया कि पिछले दो दिनों से वह और उनके सहयोगी अपने स्तर पर उन छात्रों और स्वयंसेवकों की घर वापसी की व्यवस्था कर रहे हैं, जिन्हें आंदोलन समाप्त होने के बाद कोई सहयोग नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि सीजेपी नेताओं के जंतर-मंतर से हटते ही दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थल खाली कराया और वहां मौजूद छात्रों का सामान भी हटवा दिया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि 70 से अधिक छात्र और स्वयंसेवक भोजन और ठहरने की व्यवस्था के बिना दिल्ली में फंस गए थे। उनके अनुसार, कुछ छात्रों के लिए रेलवे के तत्काल टिकट की व्यवस्था कराई गई, जबकि कुछ को अस्थायी रूप से इंडियन यूथ कांग्रेस कार्यालय में ठहराया गया।
आंदोलन से जुड़े सहयोगी ने भी जताई नाराजगी
प्रदर्शन के दौरान लगातार भोजन की व्यवस्था कराने वाले जुनैद ने भी पार्टी नेतृत्व के रवैये पर सवाल उठाए। एक मीडिया बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन समाप्त होने के बाद जब सीजेपी नेता वहां से रवाना हुए तो उन्होंने सहयोग करने वाले लोगों के प्रति सामान्य औपचारिकता भी नहीं निभाई।

सीजेपी ने आरोपों को बताया भ्रामक
विवाद बढ़ने के बाद सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास ने सभी आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर पूरे घटनाक्रम की गलत तस्वीर पेश की जा रही है।
सौरव दास के मुताबिक कार्यक्रम किसी आलीशान होटल में नहीं, बल्कि एक साधारण बेसमेंट हॉल में आयोजित किया गया था, जहां लगभग 150 से 200 स्वयंसेवक मौजूद थे। उन्होंने कहा कि पिछले 37 दिनों तक आंदोलन में सक्रिय रहे वॉलिंटियर्स का आभार व्यक्त करने के लिए यह आयोजन किया गया था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि वायरल वीडियो में कार्यक्रम का केवल एक छोटा हिस्सा दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, इससे पहले सभी स्वयंसेवकों के साथ बैठक की गई थी और उनकी सुरक्षित घर वापसी की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई। उनका कहना है कि पार्टी ने पर्दे के पीछे भी राहत और समन्वय का कार्य लगातार जारी रखा।
आरोप और सफाई के बीच जारी है विवाद
एक ओर आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों ने सीजेपी नेतृत्व पर छात्रों और स्वयंसेवकों की अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं, वहीं पार्टी इन दावों को निराधार और भ्रामक बता रही है। फिलहाल आरोप और सफाई के बीच यह विवाद जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं।
