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अकाल तख्त की नई एडवाइजरी, गुरुद्वारों में योग सत्र नहीं कराने की अपील, जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने बताई वजह

 

नई दिल्ली: अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने गुरुद्वारों में योग सत्र आयोजित किए जाने पर आपत्ति जताते हुए सभी गुरुद्वारा प्रबंधन समितियों से महत्वपूर्ण अपील की है। उन्होंने कहा कि सिख धर्म की परंपराओं और धार्मिक मर्यादा के अनुसार गुरुद्वारों के भीतर योग का कोई स्थान नहीं है। इसी कारण गुरुद्वारा परिसर, लंगर हॉल और दीवान हॉल में योग कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

सिख युवाओं की शिकायत के बाद जारी की सलाह

मंजी साहिब दीवान हॉल में आयोजित सुबह की सभा को संबोधित करते हुए कुलदीप सिंह गरगज ने बताया कि हाल के दिनों में कई सिख युवाओं ने उनसे शिकायत की थी कि कुछ गुरुद्वारों में योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन और श्वास संबंधी अभ्यास कराए जा रहे थे, जिससे समुदाय के भीतर चिंता का माहौल बना।

घर पर व्यायाम करने पर कोई आपत्ति नहीं

जत्थेदार ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के अपने घर या निजी स्थान पर शारीरिक व्यायाम करने पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि योग का मूल अर्थ परमात्मा से जुड़ना माना जाता है, लेकिन वर्तमान समय में इसका उपयोग मुख्य रूप से शारीरिक व्यायाम के रूप में किया जा रहा है। उनका कहना था कि गुरुद्वारों के भीतर इस प्रकार की गतिविधियां सिख धार्मिक परंपराओं और मर्यादा के अनुरूप नहीं हैं।

गुरुद्वारों का उद्देश्य गुरबानी से जोड़ना

उन्होंने कहा कि गुरुद्वारों की स्थापना का मूल उद्देश्य संगत को गुरबानी और ‘शब्द’ से जोड़ना है। उनके अनुसार गुरुद्वारा वह स्थान है, जहां श्रद्धालु आध्यात्मिक चिंतन और गुरु की वाणी से जुड़ते हैं। इसलिए गुरुद्वारा परिसर के भीतर योग जैसी गतिविधियों के बजाय गुरबानी, कीर्तन और धार्मिक साधना को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

‘मीरी-पीरी’ और ‘शस्त्र विद्या’ का भी किया उल्लेख

अपने संबोधन में कार्यवाहक जत्थेदार ने सिख धर्म की ‘मीरी-पीरी’ की अवधारणा और ‘शस्त्र विद्या’ की परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं ने अनुयायियों को आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों दायित्वों का संदेश दिया है। ऐसे में गुरुद्वारों के भीतर योग को बढ़ावा देना गुरु की शिक्षाओं और सिख मर्यादा से अलग आचरण माना जा सकता है।

गुरुद्वारा प्रबंधन समितियों से की विशेष अपील

कुलदीप सिंह गरगज ने सभी गुरुद्वारा प्रबंधन समितियों से आग्रह किया कि वे गुरुद्वारा परिसर में किसी भी प्रकार के योग कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति न दें। उन्होंने कहा कि जहां गुरु ग्रंथ साहिब विराजमान हैं, वहां धार्मिक मर्यादा के अनुरूप केवल गुरबानी, कीर्तन और सिख परंपराओं से जुड़ी गतिविधियों को ही स्थान मिलना चाहिए।

 

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