बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए BBAU की बड़ी पहल! शुरू हुआ एडवांस्ड डिप्लोमा कोर्स, तैयार होंगे प्रशिक्षित काउंसलर

लखनऊ: बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने की दिशा में बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ ने नई पहल की है। विश्वविद्यालय ने सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान (एसपीएनआईडब्ल्यूसीडी), क्षेत्रीय केंद्र, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में एडवांस्ड डिप्लोमा इन चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसलिंग (एडीसीजीसी) पाठ्यक्रम की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, मनोसामाजिक विकास तथा परामर्श सेवाओं के क्षेत्र में प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार करना है।

कुलपति बोले- प्रशिक्षित काउंसलरों की जरूरत पहले से ज्यादा
पाठ्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों और किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, तनाव, व्यवहारगत चुनौतियां, भावनात्मक अस्थिरता और सामाजिक दबाव लगातार बढ़ रहे हैं। बदलती जीवनशैली, डिजिटल तकनीक का बढ़ता प्रभाव, शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा तथा पारिवारिक और सामाजिक परिवेश में हो रहे बदलाव बच्चों के समग्र विकास को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में प्रशिक्षित चाइल्ड गाइडेंस और काउंसलिंग विशेषज्ञों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि बच्चों का मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य एक सशक्त समाज तथा विकसित राष्ट्र की आधारशिला है। इस दिशा में शिक्षा संस्थानों, स्वास्थ्य सेवाओं, अभिभावकों और समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह एडवांस्ड डिप्लोमा कार्यक्रम शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोविज्ञान और बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत पेशेवरों के लिए नए अवसर उपलब्ध कराएगा।
शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोविज्ञान के समन्वय पर जोर
विश्वविद्यालय के डीन अकादमिक प्रो. एस. विक्टर बाबू ने कहा कि बच्चों के समग्र विकास के लिए शिक्षा, मनोविज्ञान, स्वास्थ्य और सामाजिक कार्य के बीच समन्वित दृष्टिकोण जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह संयुक्त पहल देश में गुणवत्तापूर्ण बाल परामर्श सेवाओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने बताया समय पर परामर्श का महत्व
मुख्य वक्ता एवं बलरामपुर चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. पी. के. श्रीवास्तव ने कहा कि भारत में बाल एवं किशोर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रशिक्षित काउंसलरों की अत्यधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय तथा समय पर मनोसामाजिक सहयोग बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रख सकता है।

बाल संरक्षण और परामर्श सेवाओं को मिलेगा बल
सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र, लखनऊ के निदेशक डॉ. अनिल वी. बी. बाबू ने कहा कि यह डिप्लोमा कार्यक्रम बाल मानसिक स्वास्थ्य, बाल संरक्षण और पारिवारिक परामर्श सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि इस पाठ्यक्रम के माध्यम से ऐसे प्रशिक्षित पेशेवर तैयार किए जाएंगे, जो विद्यालयों, चिकित्सालयों, पुनर्वास केंद्रों, बाल संरक्षण संस्थाओं और सामुदायिक संगठनों में प्रभावी सेवाएं दे सकेंगे।
व्यावहारिक प्रशिक्षण पर रहेगा विशेष फोकस
गृह विज्ञान विद्यापीठ की संकायाध्यक्ष प्रो. यू. वी. किरण ने बच्चों और किशोरों में बढ़ती मनोवैज्ञानिक एवं व्यवहारगत चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए समय पर पहचान, वैज्ञानिक परामर्श और परिवार आधारित हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम की नोडल अधिकारी एवं मानव विकास एवं पारिवारिक अध्ययन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. शालिनी अग्रवाल ने बताया कि पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक अध्ययन के साथ व्यवहारिक प्रशिक्षण, पर्यवेक्षित फील्ड वर्क, केस स्टडी और इंटर्नशिप को विशेष महत्व दिया गया है, ताकि विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने का व्यावहारिक अनुभव मिल सके।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय और संस्थान के वरिष्ठ शिक्षकों, चिकित्सकों, विशेषज्ञों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों ने भी भाग लिया।
