Friday, July 31, 2026
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धर्म

आज से शुरू हुआ सावन, महादेव की कृपा पाने का शुभ अवसर; जानें जलाभिषेक का मुहूर्त, पूजा विधि और जरूरी नियम

नई दिल्ली: भगवान शिव को समर्पित पवित्र श्रावण मास की शुरुआत आज, 30 जुलाई से हो गई है। यह पावन महीना 28 अगस्त तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का पूरा महीना भगवान शिव की आराधना, व्रत, जप, तप और जलाभिषेक के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और भक्त पूरे विधि-विधान से भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं।

आज जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त

सावन के पहले दिन भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए कई शुभ मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:36 बजे से 5:24 बजे तक रहेगा। प्रातः संध्या मुहूर्त सुबह 4:39 बजे से 5:41 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:20 बजे से 1:12 बजे तक रहेगा। विजय मुहूर्त शाम 4:28 बजे से 5:29 बजे तक और प्रदोष काल शाम 5:32 बजे से रात 8:30 बजे तक रहेगा।

पहले दिन बन रहे हैं कई शुभ योग

श्रावण मास के पहले दिन श्रवण नक्षत्र के साथ आयुष्मान योग, शश महापुरुष राजयोग, हंस राजयोग और गुरु-आदित्य राजयोग का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन शुभ योगों में भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक करने का विशेष महत्व माना गया है।

सावन सोमवार की तिथियां

इस वर्ष सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त, दूसरा सोमवार 10 अगस्त, तीसरा सोमवार 17 अगस्त और चौथा सोमवार 24 अगस्त को पड़ेगा। इन दिनों शिव भक्त व्रत रखकर विशेष पूजा-अर्चना करेंगे।

ऐसे करें भगवान शिव की पूजा

सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर शुद्ध जल, गंगाजल और कच्चे दूध से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद चंदन, अक्षत, शहद और आंकड़े के फूल अर्पित करें। धूप और दीप प्रज्ज्वलित कर शिव चालीसा तथा रुद्राष्टकम का पाठ करें। इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और अंत में फल या पंचामृत का भोग लगाकर आरती करें।

सावन में इन नियमों का करें पालन

श्रावण मास के दौरान प्रतिदिन शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें। सात्विक भोजन ग्रहण करें और जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र तथा जल का दान दें। नियमित रूप से ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करना भी शुभ माना गया है।

इन बातों से करें परहेज

सावन के पूरे महीने मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन और बासी भोजन के सेवन से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में बाल, दाढ़ी और नाखून कटवाने से भी परहेज करना चाहिए। साथ ही किसी का अपमान न करें, विवादों से दूर रहें और मन, वचन तथा कर्म की पवित्रता बनाए रखें।

क्या है सावन का धार्मिक महत्व

हिंदू परंपरा में श्रावण मास भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने ग्रहण कर सृष्टि की रक्षा की थी। विष की तीव्रता को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया था। तभी से सावन के महीने में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने की परंपरा प्रचलित मानी जाती है।

 

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