कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तेजस्विन शंकर ने रचा इतिहास, डेकाथलॉन में भारत को मिला पहला पदक
नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम कर लिया। 7976 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहने वाले तेजस्विन राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में डेकाथलॉन में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। एथलेटिक्स की सबसे कठिन स्पर्धाओं में गिनी जाने वाली डेकाथलॉन में यह उपलब्धि भारतीय खेल इतिहास के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
स्वर्ण पदक ग्रेनाडा के लिंडन विक्टर ने 8096 अंकों के साथ जीता, जबकि कनाडा के अनुभवी खिलाड़ी डेमियन वार्नर 8036 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। तेजस्विन शंकर ने दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया और भारत की झोली में ऐतिहासिक कांस्य पदक डाला।

पहले दिन शानदार वापसी से बनाई मजबूत स्थिति
तेजस्विन शंकर की शुरुआत 100 मीटर दौड़ में सातवें स्थान से हुई थी। इसके बाद उन्होंने लंबी कूद में दूसरा स्थान हासिल कर अंकतालिका में अपनी स्थिति मजबूत की। हाई जंप में 2.15 मीटर की बेहतरीन छलांग लगाकर वह पहले स्थान पर रहे और कुल रैंकिंग में दूसरे स्थान तक पहुंच गए। पहले दिन के अंत तक वह पदक की दौड़ में मजबूती से बने रहे।
दूसरे दिन भी कायम रखा दमदार प्रदर्शन
प्रतियोगिता के दूसरे दिन भी तेजस्विन ने शानदार प्रदर्शन जारी रखा। 110 मीटर बाधा दौड़ और डिस्कस थ्रो में उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया। हालांकि पोल वॉल्ट और भाला फेंक में उन्हें अपेक्षित अंक नहीं मिले, जिससे वह तीसरे स्थान पर पहुंच गए। इसके बावजूद अंतिम इवेंट 1500 मीटर दौड़ में संयमित प्रदर्शन करते हुए उन्होंने कुल 7976 अंक हासिल किए और कांस्य पदक अपने नाम कर लिया।
क्या होती है डेकाथलॉन स्पर्धा?

डेकाथलॉन को एथलेटिक्स की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिताओं में माना जाता है। यह स्पर्धा दो दिनों तक चलती है और इसमें कुल 10 अलग-अलग इवेंट शामिल होते हैं। पहले दिन 100 मीटर दौड़, लंबी कूद, शॉटपुट, हाई जंप और 400 मीटर दौड़ होती है। दूसरे दिन 110 मीटर बाधा दौड़, डिस्कस थ्रो, पोल वॉल्ट, भाला फेंक और 1500 मीटर दौड़ आयोजित की जाती है।
हर स्पर्धा में प्रदर्शन के आधार पर खिलाड़ियों को अंक दिए जाते हैं और सभी 10 इवेंट्स के कुल अंकों के आधार पर अंतिम विजेता तय होता है। समय आधारित स्पर्धाओं में कम समय लेने वाले खिलाड़ी को अधिक अंक मिलते हैं, जबकि कूद और थ्रो इवेंट्स में बेहतर दूरी या ऊंचाई हासिल करने पर अधिक अंक दिए जाते हैं। इसके लिए विश्व एथलेटिक्स की आधिकारिक स्कोरिंग प्रणाली लागू होती है।
भारतीय एथलेटिक्स के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
तेजस्विन शंकर का यह कांस्य पदक केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। लगातार दो दिनों तक 10 अलग-अलग स्पर्धाओं में उच्च स्तर का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने साबित किया कि भारतीय खिलाड़ी अब बहु-इवेंट एथलेटिक्स में भी विश्व स्तर पर मजबूत चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। डेकाथलॉन में भारत का यह पहला पदक आने वाले खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का बड़ा स्रोत माना जा रहा है।
