बिहार में पेपर लीक पर सम्राट सरकार का बड़ा एक्शन, 5 सदस्यीय समिति करेगी परीक्षा व्यवस्था की जांच; 3 महीने में देगी रिपोर्ट
पटना: बिहार सरकार ने पेपर लीक और परीक्षा में कदाचार रोकने के लिए परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की तैयारी शुरू कर दी है। सम्राट चौधरी सरकार ने रविवार को पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की अधिसूचना जारी की। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या हाई कोर्ट के सेवारत अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। समिति को तीन महीने के भीतर राज्य सरकार को अपनी अनुशंसाएं सौंपनी होंगी।
समिति राज्य के विभिन्न परीक्षा बोर्डों, आयोगों, विश्वविद्यालयों और भर्ती एजेंसियों की परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेगी। इसमें परीक्षा कैलेंडर, प्रश्न-पत्र तैयार करने की प्रक्रिया, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, पेपर लीक की रोकथाम और पूरी परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने से जुड़े सुझाव दिए जाएंगे।

इन परीक्षाओं की होगी व्यापक समीक्षा
विशेषज्ञ समिति के दायरे में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक परीक्षाओं के अलावा विश्वविद्यालय, व्यावसायिक एवं तकनीकी, प्रवेश एवं पात्रता तथा भर्ती एवं प्रतियोगिता परीक्षाएं शामिल होंगी।
समिति प्रश्न-पत्र लीक, नकल, परीक्षा केंद्रों में हेराफेरी, उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ और परिणाम में अनधिकृत हस्तक्षेप जैसी गड़बड़ियों को रोकने के मौजूदा इंतजामों की समीक्षा करेगी। सरकार का लक्ष्य परीक्षा व्यवस्था को निष्पक्ष, सुरक्षित, पारदर्शी, तकनीकी रूप से सक्षम, समयबद्ध और योग्यता आधारित बनाना है।
डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल पर जोर
परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए डिजिटल तकनीक, डाटा विश्लेषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी समिति सुझाव देगी।
परीक्षा संचालन से लेकर प्रश्न-पत्र निर्माण, मूल्यांकन, परिणाम जारी करने और शिकायतों के निपटारे तक पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उपाय सुझाए जाएंगे। प्रश्न-पत्र और उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षित निगरानी के लिए उनके पूरे सफर का रिकॉर्ड रखने वाली व्यवस्था विकसित करने पर भी विचार किया जाएगा।
परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था होगी सख्त
समिति परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेगी। इसमें अभ्यर्थियों की पहचान, बायोमेट्रिक सत्यापन और सीसीटीवी निगरानी जैसे उपायों को मजबूत करने की सिफारिश की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर परीक्षा केंद्रों की जांच और निगरानी की व्यवस्था को भी बेहतर बनाने पर सुझाव दिए जाएंगे।
तीन महीने में रिपोर्ट, समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर का सुझाव
विशेषज्ञ समिति परीक्षा, मूल्यांकन और परिणाम घोषित करने में होने वाली देरी के कारणों की भी समीक्षा करेगी। इसके बाद राज्य के लिए एक समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर तैयार करने की अनुशंसा की जा सकती है।
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इस कैलेंडर में परीक्षा का विज्ञापन जारी करने, आवेदन लेने, प्रवेश-पत्र जारी करने, परीक्षा आयोजित करने, अस्थायी उत्तर कुंजी प्रकाशित करने, आपत्तियों के निपटारे, अंतिम उत्तर कुंजी जारी करने, मूल्यांकन और परिणाम घोषित करने तक की अधिकतम समय-सीमा तय करने का सुझाव दिया जा सकता है। जांच, पैनल मूल्यांकन और संबंधित अनुशंसा भेजने के लिए भी समय-सीमा निर्धारित करने पर विचार होगा।
प्रश्न-पत्र तैयार करने से लेकर सुरक्षित पहुंच तक होगी निगरानी
प्रश्न-पत्र तैयार करने की मौजूदा प्रक्रिया की भी व्यापक समीक्षा की जाएगी। समिति बहु-स्तरीय प्रश्न-पत्र तैयार करने, मॉडरेशन, प्रशिक्षित और सूचीबद्ध प्रश्न-पत्र तैयार करने वालों की व्यवस्था तथा प्रश्नों के कठिनाई स्तर को मानकीकृत करने जैसे उपायों पर सुझाव देगी।
प्रश्न-पत्रों के निर्माण, सुरक्षित भंडारण, परिवहन, वितरण, डिजिटल माध्यम से भेजने और उन तक पहुंच को नियंत्रित करने की व्यवस्था की भी समीक्षा होगी। परीक्षा सामग्री की पूरी प्रक्रिया की डिजिटल निगरानी, छेड़छाड़ रोकने वाली पैकेजिंग और सुरक्षित डिजिटल संचार व्यवस्था जैसे उपायों की व्यवहारिकता भी जांची जाएगी।
साइबर सुरक्षा से लेकर जियो-फेंसिंग तक पर मंथन
समिति बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, स्थान आधारित निगरानी, जियो-टैगिंग और जियो-फेंसिंग जैसे सुरक्षा उपायों की व्यवहारिकता का अध्ययन करेगी। परीक्षा व्यवस्था में साइबर सुरक्षा ऑडिट को भी मजबूत करने पर सुझाव दिए जाएंगे।
इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डाटा विश्लेषण का इस्तेमाल कर परीक्षा प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ियों की पहचान और रोकथाम के उपाय सुझाए जा सकते हैं। सरकार को उम्मीद है कि समिति की सिफारिशों से बिहार में परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में मदद मिलेगी।

