AI-साक्षर भारत बनाने का मिशन, मनीत जैन बोले- बच्चों को सिर्फ यूजर नहीं, जिम्मेदार तकनीकी नागरिक बनाना होगा

नई दिल्ली: ह्युमेन एआई लिटरेसी मिशन (HAILM) के चीफ विज़नरी मनीत जैन ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तेजी से बच्चों के सीखने, काम करने और निर्णय लेने के तरीकों को प्रभावित कर रही है। ऐसे में यह जरूरी है कि विद्यार्थी केवल इस तकनीक का उपयोग करना ही न सीखें, बल्कि इसकी संभावनाओं, सीमाओं और जिम्मेदारियों को भी गहराई से समझें। उन्होंने कहा कि एआई-साक्षर भारत के निर्माण के लिए समग्र विद्यालय (होल-स्कूल) दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है।

मनीत जैन ने कहा कि इस दृष्टिकोण के तहत स्कूल नेतृत्व को प्रभावी और सूचित नीतियां बनाने, शिक्षकों को एआई के जिम्मेदार उपयोग के लिए मार्गदर्शन देने तथा छात्रों को भविष्य को आकार देने वाली तकनीकों की समझ विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उनका कहना था कि एआई शिक्षा को केवल तकनीकी विषय के रूप में नहीं, बल्कि जिम्मेदार डिजिटल नागरिक तैयार करने के माध्यम के रूप में देखा जाना चाहिए।
सभी के लिए निःशुल्क और सुलभ होगी एआई शिक्षा
मनीत जैन ने कहा कि ह्युमेन एआई लिटरेसी मिशन का उद्देश्य मौलिक एआई साक्षरता को निःशुल्क और सभी के लिए सुलभ बनाना है। इसके लिए विद्यालयों को एक संरचित शिक्षण पथ उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे व्यवस्थित तरीके से एआई शिक्षा को अपने शिक्षण तंत्र में शामिल कर सकें और छात्रों को चरणबद्ध तरीके से इस तकनीक की जानकारी दे सकें।

‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य में देगा योगदान
उन्होंने कहा कि मिशन का उद्देश्य एआई शिक्षा तक पहुंच का लोकतंत्रीकरण करना है, ताकि देश के अधिक से अधिक विद्यार्थी आधुनिक तकनीकों की समझ विकसित कर सकें। उनके अनुसार यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और ऐसी नई पीढ़ी तैयार करेगी, जो उभरती तकनीकों को समझने, उनका जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने और समाज के हित में सकारात्मक दिशा देने में सक्षम होगी।
