बदरीनाथ धाम चढ़ावा विवाद में बड़ा एक्शन! जांच तेज, CCTV फुटेज खंगाले जाएंगे, कांग्रेस ने सत्याग्रह का किया ऐलान
नई दिल्ली: अयोध्या राम मंदिर के बाद अब उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला सुर्खियों में है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। समिति ने चार सदस्यीय जांच दल का गठन करते हुए एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। इस पूरे मामले में अब सबसे ज्यादा निगाहें मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज पर टिकी हैं, जिससे घटना की सच्चाई सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
एक जून से सक्रिय हैं नए CCTV कैमरे

मंदिर समिति के अनुसार मंदिर परिसर में नए सीसीटीवी कैमरे एक जून से लगाए गए थे, जबकि कथित घटना दो जुलाई की बताई जा रही है। ऐसे में उस दिन की पूरी रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी सिस्टम में करीब 45 दिनों तक का डेटा सुरक्षित रहता है, जिससे जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल सकते हैं।
सभी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित
मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि जांच समिति सभी उपलब्ध साक्ष्यों, वैज्ञानिक तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। उन्होंने चढ़ावा गणना से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। जांच पूरी होने तक सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं।
चार सदस्यीय समिति कर रही है जांच
मामले की जांच के लिए गठित समिति में वित्त नियंत्रक हेम कांडपाल, विधि अधिकारी एसएस वर्त्वाल, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डीएस भुजवाण को शामिल किया गया है। समिति चढ़ावे की गणना प्रक्रिया की समीक्षा करने के साथ-साथ संबंधित कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रही है।
कांग्रेस ने 8 जुलाई को सत्याग्रह का किया ऐलान

चढ़ावा विवाद अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। उत्तराखंड कांग्रेस ने 8 जुलाई को पूरे प्रदेश में उपवास और सत्याग्रह करने की घोषणा की है। कांग्रेस का आरोप है कि मंदिरों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। पार्टी ने पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक जांच कराने की भी मांग उठाई है।
श्री बदरीश पंडा पंचायत ने भी जताई चिंता
श्री बदरीश पंडा पंचायत ने भी इस मामले को मंदिर की गरिमा से जुड़ा गंभीर विषय बताया है। पंचायत का कहना है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। तीर्थपुरोहितों और पुजारियों ने भी इस पूरे घटनाक्रम को धाम की प्रतिष्ठा से जुड़ा संवेदनशील मामला बताया है।
जांच रिपोर्ट और CCTV फुटेज पर टिकी सबकी नजर
अब पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका जांच समिति की रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज की होगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी व्यापक चर्चा का विषय बन सकता है।
